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दिल्ली में वायु प्रदूषण, उम्मीद से काफी पहले ही 'बहुत खराब' हो गई हवा

इस साल दिल्ली की वायु गुणवत्ता औसत से करीब एक हफ्ते पहले 300 के पार पहुंच गई. इस सीजन में पहली बार 13 अक्टूबर को दिल्ली की हवा बहुत खराब हो गई, जब 24 घंटे के लिए औसत AQI ठीक 300 रहा.

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दिल्ली में वायु प्रदूषण (फोटो- पीटीआई)
दिल्ली में वायु प्रदूषण (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में बढ़ रहा वायु प्रदूषण
  • हवा की गुणवत्ता हुई खराब
  • बहुत खराब श्रेणी में दिल्ली की हवा

वायु प्रदूषण दिल्ली की सालाना समस्या है. लेकिन इस बार राजधानी की हवा उम्मीद से थोड़ा पहले ही खराब हो गई. गुरुवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index-AQI) 312 तक पहुंच गया, जो कि 'बहुत खराब' गुणवत्ता की श्रेणी में आता है.

एक हफ्ते में यह दूसरी बार है जब AQI ने 300 का आंकड़ा पार किया है. इसके अलावा, पिछले चार सालों में ये पहली बार है कि अक्टूबर के मध्य तक दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो गई.

दिल्ली की खराब हवा

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के दैनिक AQI बुलेटिन में जारी किए गए आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए DIU ने पाया कि आम तौर पर दिल्ली की वायु गुणवत्ता 18-20 अक्टूबर तक ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में पहुंचती है. 2016 में दिल्ली का AQI पहली बार 23 अक्टूबर को और 2017 में 17 अक्टूबर को 300 के पार गया था. 2018 में यह 17 अक्टूबर को 300 के पार गया. 2019 में AQI 16 अक्टूबर को बहुत खराब की श्रेणी में पहुंचा था.

इस साल दिल्ली की वायु गुणवत्ता औसत से करीब एक हफ्ते पहले 300 के पार पहुंच गई. इस सीजन में पहली बार 13 अक्टूबर को दिल्ली की हवा बहुत खराब हो गई, जब 24 घंटे के लिए औसत AQI ठीक 300 रहा. 15 अक्टूबर को यह 312 तक पहुंच गया. ये भी पांच साल में पहली बार है कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े में ही दिल्ली की हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' की श्रेणी में पहुंच गई.  

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CPCB के मुताबिक, इन दोनों दिनों में हवा में प्रदूषण का मुख्य कारण PM10 और PM2.5 रहा. CPCB का कहना है कि बहुत खराब क्वालिटी की हवा में सांस लेने या लंबे समय तक इसमें रहने पर सांस की बीमारी हो सकती है.

दिल्ली नहीं है सबसे प्रदूषित शहर

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है इसलिए खराब एयर क्वालिटी के लिए ये सुर्खियों में रह सकती है, लेकिन दिल्ली अब भी देश का सबसे प्रदूषित शहर नहीं है. DIU ने सभी शहरों के साप्ताहिक AQI की पड़ताल की और पाया कि दिल्ली देश के सबसे प्रदूषित शहरों में 13वें स्थान पर है. CPCB के मुताबिक, दिल्ली से बमुश्किल 40 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के बागपत में अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में हवा की गुणवत्ता सबसे खराब दर्ज की गई.

यहां पूरे हफ्ते AQI का औसत 303 रहा. पिछले चार दिनों से बागपत का AQI लगातार 300 से ऊपर दर्ज किया गया है. बागपत के बाद भिवाड़ी है, जो राजस्थान का एक औद्योगिक शहर है. ये दिल्ली से 80 किलोमीटर दूर है और इसका AQI औसत 293 है. हरियाणा का एक शहर चरखी दादरी, जो दिल्ली से करीब 90 किलोमीटर दूर है, अक्टूबर के पहले सप्ताह के दौरान सबसे प्रदूषित शहरों में से एक रहा. 283 AQI के साथ यह तीसरे नंबर पर रहा.

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इसके बाद हरियाणा का ही इंडस्ट्रियल जिला पानीपत रहा जिसका AQI 286 रहा. उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर, गाजियाबाद, मेरठ, ग्रेटर नोएडा, आगरा और मुजफ्फरनगर, हरियाणा के जींद और यमुनानगर में AQI का औसत दिल्ली से ज्यादा दर्ज किया गया. दिल्ली के पड़ोसी जिलों में भी वायु गुणवत्ता इसी तरह की दर्ज की गई है. वहां भी स्थिति खराब हो रही है.

दिल्ली का AQI गुरुवार को जब 312 दर्ज किया गया, तो पड़ोसी हरियाणा के फरीदाबाद और गुरुग्राम में AQI क्रमशः 335 और 311 दर्ज किया गया. दिल्ली के पड़ोसी और उत्तर प्रदेश के जिलों ग्रेटर नोएडा (357), नोएडा (321) और गाजियाबाद (322) में भी गुरुवार को हवा की गुणवत्ता बहुत खराब दर्ज की गई.

दोषी किसे ठहराया जाए?

इस सीजन में मौसम ठंडा होना शुरू हो जाता है, जिसमें हवा में मौजूद कण संघनित (condense) हो जाते हैं. हालांकि, इसी सीजन में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में किसान धान की कटाई के बाद पराली जलाते हैं और प्रदूषण की जिम्मेदारी उन पर डाली जाती है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि खराब हवा से बचने के लिए पराली जलाने से रोका जाना चाहिए, क्योंकि यह हर किसी को प्रभावित कर रहा है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जावड़ेकर ने कहा, “सर्दियों के दौरान दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती है. हिमालय की हवा, गंगा से उठने वाली नमी, उत्तर भारत में धूल का प्रदूषण, ये सब मिलकर दिल्ली के मैदानी क्षेत्र में प्रदूषण का कारण बनते हैं.” जिस समय वे किसानों से खेतों में पराली न जलाने का अनुरोध कर रहे थे, उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण का मुख्य कारण पराली जलाना नहीं है.

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पर्यावरण मंत्री ने कहा कि जिस हफ्ते दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हुई, किसानों के पराली जलाने से AQI के स्तर में सिर्फ 4 फीसदी का असर पड़ा. हालांकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसकी आलोचना भी  की. इस आलोचना के जवाब में जावड़ेकर ने स्पष्टीकरण दिया कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया.

उन्होंने कहा कि दिल्ली के AQI में पराली जलाने से​ सिर्फ 4 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई लेकिन ये बात सिर्फ पिछले हफ्ते के बारे में थी. पराली जलाने के पीक सीजन में इसकी वजह से प्रदूषण 40 फीसदी तक बढ़ जाता है.

पर्यावरण मंत्री ने ट्वीट किया, “हमें इस बात से इनकार नहीं करना चाहिए कि प्रदूषण के कई स्थानीय कारण हैं- वाहन प्रदूषण, गैर-कृषि जैव ईंधन, धूल, भौगोलिक और मौसम संबंधी- कई तरह के प्रदूषण हैं जो सर्दियों के दौरान दिल्ली में प्रदूषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं.”

 

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