देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के फैकल्टी मेंबर्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन से मुलाकात कर सैलरी बढ़ाने की मांग की है. इनका कहना है कि जिन डॉक्टरों को इन्होंने ट्रेंड किया है, उन जूनियर डॉक्टरों को इन से कहीं ज्यादा सैलरी मिलती है. इतना ही नहीं कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात असिस्टेंट प्रोफसरों ने समान काम के लिए समान अधिकारों की मांग की है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से मुलाकात करने के बाद एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ विजय गुर्जर का कहना है कि कानून यह कहता है कि समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए. ऐसे में जो काम हम करते हैं उसका वेतन काम के हिसाब से बेहद कम है.
उन्होंने कहा कि हमारे जूनियर डॉक्टर्स का वेतन हमसे कहीं ज्यादा है. स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को सौंपी चिट्ठी में डॉक्टरों ने लिखा है कि एम्स के कॉन्ट्रैक्ट फैकेल्टी मेंबर्स जो एम्स में असिस्टेंट प्रोफसर के पद पर तैनात हैं, उन सब की तरफ से यह मांग की जाती है कि समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए.
देशभर के एम्स से उठती रही है ये मांग
राजधानी दिल्ली के एम्स में गेरियाट्रिक डिपार्टमेंट में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर ने बताया कि आम तौर पर प्राइवेट कॉलेज से उन्हें यहां की सैलरी से तीन गुना तक के ऑफर आते हैं लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर अगर यहां से नहीं जाते हैं, तो सरकार को सोचना चाहिए.
दरअसल देश भर की एम्स से समय-समय पर कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर इस मांग को उठाते रहे हैं. इनकी मांगो में लीव गारंटी भी शामिल है. आपको बता दें कि एम्स देश का सबसे ज्यादा व्यस्तम अस्पताल है, जहां देशभर से हजारों मरीज रोजाना अपने इलाज के लिए आते हैं.
लोकसभा में उठ चुका है इस्तीफों का मुद्दा
जदयू के जहानाबाद से सांसद चंदेश्वर प्रसाद ने 19 जुलाई को लोकसभा में पूछा था कि क्या कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने हाल ही में दिल्ली के निजी अस्पतालों में सेवा देने के लिए एम्स, सफदरजंग और राम मनोहर लोहिया जैसे अस्पतालों को छोड़ा है. उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने वाले चिकित्सकों की संख्या और केंद्रीय अस्पतालों से चिकित्सकों के पलायन को रोकने के लिए उपायों की जानकारी मांगी थी.
लोकसभा में जवाब देते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा था कि पिछले एक वर्ष के दौरान एम्स (नई दिल्ली) से 10 और सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज से 15 डॉक्टरों ने इस्तीफे दिए. वहीं डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल से एक चिकित्सक ने इस्तीफा दिया.