scorecardresearch
 

एम्स के साथ मिलकर आयुर्वेद पर शोध करवा रही सरकार

दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों के साथ मिलकर आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के वैज्ञानिकों ने नए शोधों पर काम शुरू कर दिया है. इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों से भी सहयोग लिया जा रहा है.

Advertisement
X
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपाद नाइक का कहना है कि आयुर्वेद के क्षेत्र में नई दवाओं को तलाशने का काम किया जा रहा है. दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों के साथ मिलकर आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के वैज्ञानिकों ने नए शोधों पर काम शुरू कर दिया है. इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों से भी सहयोग लिया जा रहा है.

इससे पहले केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने राज्य सभा में बताया था कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने डायबिटीज के टाइप-2 मरीजों के लिए वैज्ञानिक तरीके से एक दवा विकसित की है जिसे बीजीआर- 34 के नाम से बाजार में उपलब्ध करवाया जा रहा है. नाइक ने पिछ्ले दिनों राज्य सभा सांसद झरना दास वैद्य के सवाल पर संसद में लिखित जवाब देते हुए बताया कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की दो प्रयोगशालाओं ने साझा प्रयास के अंतर्गत वैज्ञानिक हर्बल दवा विकसित की है.

Advertisement

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स और नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ में स्थित हैं. इन दोनों संस्थाओं ने हाइपोग्लाइसेमिक नुस्खा एनबीआरएमएपी-डीबी तैयार किया है. वहीं इसका व्यावसायिक लाइसेंस एमिल फार्मा लिमिटिड, दिल्ली को दिया गया है. यही कंपनी इसका निर्माण और वितरण कर रही है.

श्रीपद नाइक द्वार दिए गए जवाब के बारे में बीजीआर-34 को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एनबीआरआई, लखनऊ के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एकेएस रावत का कहना है कि इस दवा को मिली कामयाबी का सबूत है कि मंत्री ने अपने जवाब में इसका जिक्र किया है.

वैज्ञानिक रावत का कहना है कि टाइप-2 डायबिटीज वयस्कों में सामान्यतः उनकी जीवनशैली की वजह से होता है, जबकि टाइप-1 डायबिटीज अनुवांशिक होता है. रावत ने आगे बताय कि आयुर्वेद में वर्णित 500 जड़ी-बूटियों पर गहन अध्ययन और शोध के बाद अंततः छह सर्वश्रेष्ठ का चयन किया गया. दारूहरिद्रा, गिलोय, विजयसार और गुड़मार आदि का चयन मधुमेह के इलाज में इनके प्रभाव को देखते हुए किया गया है.

रावत के मुताबिक़ मुताबिक, डायबिटीज के पुराने और गंभीर मामलों में इसका उपयोग मुख्य इलाज के साथ एडजंक्ट थेरेपी के लिए किया जा सकता है क्योंकि इसे लीवर और किडनी के लिए अनुकूल प्रभाव पैदा करने वाला और साथ ही वसा असंतुलन को रोकने वाला पाया गया है.

Advertisement

बता दें कि डायबिटीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोदी सरकार ने 2016 में ‘मिशन मधुमेह’ शुरू किया था, जिसके तहत आयुर्वेद के माध्यम से बचाव और नियंत्रण के लिए मसौदा तैयार किया जा रहा है. (Source-IANS)

Advertisement
Advertisement