छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था की बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. अबूझमाड़ जैसे अति संवेदनशील इलाके में आज भी छात्राओं को शौच के लिए जंगल जाना पड़ रहा है, जबकि बच्चे जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं. मामला जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय, कोहकामेटा का है. इस स्कूल में करीब 150 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है.
स्कूल की हालत बेहद खराब है. छत से पानी टपकता है, दीवारों में दरारें हैं और फर्श कई जगहों से उखड़ चुका है. बारिश के दौरान कक्षाओं में पानी भर जाता है, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है. सबसे गंभीर बात यह है कि छठवीं से बारहवीं तक की छात्राओं के लिए स्कूल में शौचालय नहीं है. छात्राएँ पिछले 10 सालों से शौच के लिए जंगल जाने को मजबूर हैं. इस दौरान उन्हें सांप-बिच्छू और जंगली कीड़ों का खतरा रहता है.
छात्राओं का कहना है कि जंगल जाना असुरक्षित होने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी परेशान करने वाला है. लड़कों के सामने शौच के लिए जाना उन्हें शर्मिंदगी में डाल देता है, लेकिन शिकायतों के बावजूद हालात नहीं बदले. स्थानीय अभिभावकों ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया है. उनका कहना है कि ऐसे हालात में बेटियों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं है. वे सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं. इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने भी प्रशासन को घेरा है. पार्टी नेता नरेंद्र नाग ने कहा कि कई बार जिला प्रशासन को आवेदन दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर कलेक्टर कार्यालय में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा.
पूरा मामला आदिवासी इलाकों में विकास के सरकारी दावों पर सवाल खड़े करता है. सवाल यह है कि जब वीआईपी दौरे पर व्यवस्थाएं रातों-रात हो सकती हैं, तो वर्षों से बदहाल स्कूलों की हालत क्यों नहीं सुधरती.अब देखना होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद प्रशासन जागता है या फिर अबूझमाड़ की बेटियां यूं ही जंगल में शौच और जर्जर स्कूल भवनों के बीच पढ़ने को मजबूर रहेंगी.