छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के एक गांव में करीब 20 बंदरों की मौत हो गई और चार सड़े हुए शव बरामद हुए हैं. इस मामले में वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है. ग्राम पंचायत के एक पदाधिकारी ने बताया कि गांव के कुछ लोगों ने बंदरों को भगाने के लिए दो मजदूरों को रखा था, जिन्होंने गोली मारकर 17 बंदरों को मार दिया. हालांकि वन विभाग के अधिकारी ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि बंदरों की मौत की वजह अभी क्लीयर नहीं है. कुछ संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है.
बेलगांव ग्राम पंचायत के पंच सीताराम वर्मा ने सोमवार को न्यूज एजेंसी को बताया कि यह घटना 28 अगस्त को बेलगांव गांव में हुई जब कुछ ग्रामीणों ने बंदरों को बस्ती से भगाने के लिए काम पर रखा था और उन्होंने बंदूकों से गोलियां चला दीं. इसमें कुछ बंदर घायल भी हो गए.
वर्मा के अनुसार, घरों पर आक्रमण करने और बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले बंदरों पर नजर रखने के लिए मजदूरों को नियुक्त करने के लिए हाल ही में गांव में एक बैठक बुलाई गई थी. मैंने इसका विरोध किया क्योंकि बंदरों की हनुमान के रूप में पूजा की जाती है. मैं उन्हें परेशान करने के लिए हिंसक उपायों का सहारा लेने से सहमत नहीं था.
उन्होंने दावा किया कि कई बंदरों के शवों को आवारा कुत्तों ने खा लिया. वन विभाग सात बंदरों के सड़े हुए शव और कंकाल ले गया. घायल बंदरों में से कुछ की मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य भाग गए. उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग घटना को छिपाने की कोशिश कर रहा है.
वन विभाग के अधिकारी ने क्या बताया?
वहीं इस दावे को लेकर दुर्ग वन प्रभाग के डीएफओ ने कहा कि गांव से अबतक चार बंदरों के सड़े हुए शव बरामद किए गए हैं. उन्होंने कहा कि 18-19 बंदरों की मौत की जानकारी का आकलन करने के लिए इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. जिन शवों को लाया गया था, उनका पोस्टमार्टम संभव नहीं था क्योंकि शव पूरी तरह सड़ चुके थे. केवल कंकाल बचे हैं. सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं.