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छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव में BJP ने लक्ष्मी वर्मा पर लगाया दांव, जानें इसके राजनीतिक मायने

छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कुर्मी समुदाय से आने वाली लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाकर अहम दांव खेला है. महिला आयोग की सदस्य और पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष रहीं लक्ष्मी वर्मा एक ग्राउंड कनेक्ट वाली नेता मानी जाती हैं.

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बीजेपी ने कुर्मी समुदाय से आने वाले लक्ष्मी वर्मा को छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया. (Photo: FB/@OPChaudhary)
बीजेपी ने कुर्मी समुदाय से आने वाले लक्ष्मी वर्मा को छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया. (Photo: FB/@OPChaudhary)

छत्तीसगढ़ में आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है. राज्य की दो राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से एक सीट विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के आधार पर बीजेपी के लिए लगभग सुरक्षित मानी जा रही है. इसी सीट के लिए पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी का यह फैसला केवल पार्टी संगठन ही नहीं, बल्कि सोशल-पॉलिटिकल इंजीनियरिंग के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.

लक्ष्मी वर्मा वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य हैं और बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रही हैं. उनका महिला वर्ग में मजबूत प्रभाव माना जाता है और वह लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं. इससे पहले वह रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं और पार्टी की मीडिया प्रवक्ता के तौर पर भी काम कर चुकी हैं. लक्ष्मी वर्मा कुर्मी समुदाय से आती हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक प्रभावशाली ओबीसी वोट बैंक माना जाता है.

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पार्टी संगठन में उन्होंने वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं और जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत रही है. बीजेपी का मानना है कि उनके अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक जुड़ाव को देखते हुए वह राज्यसभा के लिए एक मजबूत उम्मीदवार साबित होंगी. छत्तीसगढ़ में सामने आई जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट (क्वांटिफायबल डेटा कमीशन) के अनुसार, कुर्मी समुदाय राज्य के ओबीसी वर्ग में 5वें स्थान पर है. इस समुदाय की आबादी लगभग 8.37 लाख बताई गई है, जो राज्य की कुल आबादी का करीब 6 से 7 फीसदी है.

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ऐसे में कुर्मी समुदाय से राज्यसभा उम्मीदवार उतारना बीजेपी की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, कुर्मी समुदाय से आने वाली उम्मीदवार को संसद के उच्च सदन में भेजने से बीजेपी इस वर्ग को यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी उनकी पहचान और भागीदारी को महत्व देती है. इससे न केवल सामाजिक संतुलन साधने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य के चुनावों में इस समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी.

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