बिलासपुर में सैकड़ों की तादाद में स्कूली ड्रेस कचरे के ढेर में पाई गई हैं. आग से जल जाने के कारण कोई भी ड्रेस उपयोग करने लायक नहीं बची. नेवी ब्लू और ब्लैक कलर की शर्ट देखने से पता चला है कि ये स्कूल ड्रेस हैं. मामले की शिकायत के बाद प्रशासन ने ये ड्रेस जब्त कर ली हैं और जांच के आदेश दिए हैं.
बिलासपुर के साइंस कॉलेज मार्ग पर स्थित कचरे के ढेर में बड़ी तादाद में जली स्कूली ड्रेस देखकर लोग हैरत में पड़ गए. फ़ौरन घटना की जानकारी स्थानीय लोगों ने प्रशासन को दी. प्रशासन ने स्कूली शिक्षा विभाग से मामले की तस्दीक कराई. अंदेशा ये भी जाहिर किया जा रहा है कि यह किसी वर्कशॉप से फेंका गया स्कूल ड्रेस का अनुपयोगी कपड़ा तो नहीं है. हालांकि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा.
बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी हेमंत उपाध्याय के मुताबिक, कचरे के ढेर में जले हुए स्कूली यूनिफॉर्म के अलावा कपड़े के थान भी मिले हैं. इसलिए आशंका ये भी है कि यह माल किसी यूनिफॉर्म सिलाई करने वाली वर्कशॉप का है. उन्होंने दावा किया है कि जिले के सभी सरकारी स्कूलों में काफी पहले ड्रेस वितरित हो चुकी हैं और छात्र-छात्राएं उसे पहन भी रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस मामले में जांच के निर्देश दिए गए है.
बिलासपुर में सरकंडा इलाके में साइंस कॉलेज स्थित है. यहां से शनिचरी बाजार जाने वाले मार्ग में स्थित सड़क किनारे कचरे के ढेर में राहगीरों ने बड़ी तादाद में स्कूल ड्रेस देखी. बिलासपुर में सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म बनाने की जिम्मेदारी स्व सहायता समूहों को दी गई थी. सरकार के हथकरघा विभाग के जरिए स्व सहायता समूह को कपड़ा मुहैया कराया गया था. अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि कहीं समूहों की आपसी लड़ाई का यह नतीजा तो नहीं है. ये भी पता लगाया जा रहा है कि किस समूह को कितना कपड़ा हाथकरघा विभाग ने दिया था. बीईओ एम. एल पटेल के मुताबिक, जल्द ही रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी.
बिलासपुर में सभी सरकारी स्कूलों में जून जुलाई महीने में ही बच्चों को निशुल्क यूनिफॉर्म देने का आदेश जारी किया गया था. बच्चों के शरीर की नाप सही तरीके से लेने और अच्छी गुणवत्ता वाली यूनिफॉर्म उन्हें मुहैया कराने के लिए अफसरों ने गंभीरता दिखाई थी. यह भी कहा जा रहा है कि दूरस्थ अंचलों के बच्चों को अभी तक इस शिक्षण सत्र की स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं हो पाई है. फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है.