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इस शख्स की इंग्लिश क्रिकेट कॉमेंट्री देखकर चौंक जाएंगे आप, लगेगा मैच सुन रहे हैं

कटिहार जिले के मनिहारी अनुमंडल के गांव गोवागाछी के रहने वाले वरुण देव सरकारी स्कूल में कार्यकारी प्रिंसिपल हैं. वे मौजूदा समय में अमदाबाद प्रखंड के कन्या उच्च विद्यालय में तैनात हैं. वरुण देव की अंग्रेजी में क्रिकेट कॉमेंट्री को सुनकर हर कोई दंग रह जाता है.

कटिहार जिले के छोटे से गांव में रहने वाले हैं वरुण देव कटिहार जिले के छोटे से गांव में रहने वाले हैं वरुण देव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कटिहार जिले के छोटे से गांव के रहने वाले हैं वरुण देव
  • विदेशियों की तरह फर्राटेदार अंग्रेजी में करते हैं क्रिकेट कॉमेंट्री
  • इंग्लिश कमेंटेटर के नाम पर बुलाते हैं लोग

इंग्लिश में क्रिकेट की कमेंट्री को समझ पाना बेहद मुश्किल माना जाता है. फिर जहां इसे बोलने की बात आए, तो पसीने छूट जाते हैं, लेकिन हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी अंग्रेजी पर खास पकड़ है. बिहार जिले के कटिहार के गांव गोवागाछी के वरुण देव को अपनी इस खासियत की वजह से इंग्लिश कमेंटेटर कहा जाता है. वरुण देव कहते हैं कि बचपन में क्रिकेट वर्ल्ड कप को देखने के दौरान उन्हें इंग्लिश का ऐसा चस्का लगा, कि इस भाषा में महारत हासिल करने की मन में ठान ली. 

सरकारी स्कूल में कार्यकारी प्रिंसिपल हैं वरुण देव

कटिहार जिले के मनिहारी अनुमंडल के गांव गोवागाछी के रहने वाले वरुण देव सरकारी स्कूल में कार्यकारी प्रिंसिपल हैं. वे मौजूदा समय में अमदाबाद प्रखंड के कन्या उच्च विद्यालय में तैनात हैं. वरुण देव की अंग्रेजी में क्रिकेट कमेंट्री को सुनकर हर कोई दंग रह जाता है. जिस तरह किसी भी ​बड़े क्रिकेट मैच में ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड के कमेंटेटर कमेंट्री करते हैं, उसी प्रकार वरुण देव भी क्रिकेट की कमेंट्री करते हैं.

वरुण देव कहते हैं कि अंग्रेजी भाषा पर ठोस पकड़ करने की प्रेरणा उन्हें मुंबई में रह रहे अपने भाई से मिली. वैसे बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल वरुण अंग्रेजी के अलावा गणित और विज्ञान में भी काफी होशियार हैं. जिले में कोई भी बड़ा आयोजन होता है, तो उस कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी वरुण को दी जाती है. 

1992 से की क्रिकेट कमेंट्री करने की शुरुआत
वरुण ने बताया कि 1975 में हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया. उस दौरान वे कक्षा 5वीं के छात्र थे. क्रिकेट की फर्राटेदार अंग्रेजी में कमेंट्री सुन उनके मन में भी इच्छा जागने लगी. वरुण ने बताया कि वर्ल्ड कप की कमेंट्री सुनकर उन्हें बहुत हद तक अंग्रेजी की समझ आने लगी.

हालांकि, अंग्रेजी कमेंटेटर का उच्चारण समझने में उन्हें थोड़ी समस्या आई, लेकिन समय के साथ उन्होंने इस समस्या को भी दूर कर लिया. उन्होंने बताया कि 1992 में स्थानीय स्तर पर हुए क्रिकेट टूर्नामेंट में कमेंट्री करना स्टार्ट कर दिया. वरुण ने भागलपुर यूनिवर्सिटी से एमएससी करने के बाद भी अपने इस हुनर को और निखारने के लिए विदेशी कमेंटेटर के बोलने के तरीके और उनकी शैली को बारीकी से सुना और जाना. 


अंतरराष्ट्रीय कमेंटेटर बनना चाहते हैं वरुण

वरुण देव पेशे से शिक्षक हैं, लेकिन वे अपने अंदर की इस प्रतिभा को एक मंच देना चाहते हैं. वरुण देव का कहना है कि उनकी इच्छा अंतरराष्ट्रीय कमेंटेटर बनने की है, लेकिन उनके पास ऐसा कोई माध्यम नहीं है, जिससे वे अपना ये सपना पूरा कर सकें. वरुण कहते हैं कि वे क्रिकेट की भाषा को बहुत ही अच्छी तरह समझते हैं. कोई भी उनके इस हुनर की पहचान नहीं कर पा रहा है. कटिहार के सुदूर गांव में वरुण अपने अंदर इस प्रतिभा को ​छुपाये हुए सादगी के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं.

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