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बिहार: संक्रमण के डर पर आस्था पड़ी भारी, लोग बोले- पहले नेताओं की रैली रोको

उत्तरायणी गंगा के तट पर बिहार के साथ ही उत्तर प्रदेश सहित कई जिलों से लोग आए थे. यूपी से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि सरकार नेताओं की रैली पर या बड़े-बड़े कार्यक्रमों पर रोक नहीं लगाती, लेकिन आम आदमी की आस्था पर सबसे पहले रोक लगाई जाती है.

मकर संक्रांति के अवसर पर बक्सर के रामरेखा घाट पर लगी लोगों की भीड़. कोरोना को दरकिनार कर लोग आस्था की डुबकी लगाते रहे. मकर संक्रांति के अवसर पर बक्सर के रामरेखा घाट पर लगी लोगों की भीड़. कोरोना को दरकिनार कर लोग आस्था की डुबकी लगाते रहे.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उत्तर प्रदेश के भी कई जिलों से लोग पहुंचे स्नान करने
  • बक्सर के रामरेखा घाट पर हजारों की संख्या में लोग पहुंचे

बिहार में तेजी से बढ़ते कोरोना केस के बाद सरकार ने मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान पर रोक लगा दिया था. लेकिन आज नजारा कुछ अलग ही नजर आया और भीड़ ने सभी प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाते हुए गंगा में स्नान किया. बक्सर के रामरेखा घाट पर हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई. लोगों की मानें तो साल में एक बार ही यह मौका आता है. ऐसे में सरकार कोरोना के नाम पर प्रतिबंध लगाकर आस्था को ठेस पहुंचा रही है.

शनिवार को उत्तरायणी गंगा के तट पर बिहार के साथ ही उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लोग आए थे. यूपी से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि सरकार नेताओं की रैली पर या बड़े-बड़े कार्यक्रमों पर रोक नहीं लगाती, लेकिन आम आदमी की आस्था पर सबसे पहले रोक लगाई जाती है. 

बक्सर के रामरेखा घाट, नात बाबा घाट सहित ब्रह्मपुर प्रखंड के दर्जनभर घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आई. इससे साफ पता चलता है कि कोरोना वायरस पर लोगों की आस्था इस बार फिर भारी पड़ी है.

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