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सुहाग उजाड़ने वाले कैदी ने भरी भाभी की मांग

कहा जाता है कि किसी भी व्यक्ति का जीवन-साथी भगवान तय कर मनुष्य को मृत्युलोक में भेजते हैं. किसी ने भी यह नहीं सोचा होगा कि न्यायालय में जिसके बयान के कारण जो व्यक्ति उम्रकैद की सजा काट रहा है, वही बयान देने वाली भाभी उसकी जीवन-संगिनी बन जाएगी.

कहा जाता है कि किसी भी व्यक्ति का जीवन-साथी भगवान तय कर मनुष्य को मृत्युलोक में भेजते हैं. किसी ने भी यह नहीं सोचा होगा कि न्यायालय में जिसके बयान के कारण जो व्यक्ति उम्रकैद की सजा काट रहा है, वही बयान देने वाली भाभी उसकी जीवन-संगिनी बन जाएगी. मगर ऐसा ही हुआ बिहार के बक्सर केंद्रीय कारागार की ओपेन जेल में.

अपने ही भाई के कत्ल के जुर्म में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी 40 वर्षीय मोनारिक यादव ने सोमवार को अपनी विधवा भाभी मालो देवी की सूनी मांग में सिंदूर भर उसे फिर से सुहागन बना दिया. पुलिस के अनुसार, दोनों का विवाह हिंदू रीति-रिवाज के साथ संगमेश्वर भगवान शिव मंदिर में धूमधाम के साथ संपन्न हुआ.

इसमें न केवल मुक्त (ओपन) जेल के कैदी शामिल हुए, बल्कि जेल प्रशासन के अधिकारी भी शामिल होकर वर-वधू को आशीर्वाद दिया. इसके पूर्व दोनों ने न्यायालय में जाकर भी विवाह कर एक-दूसरे के साथ जीने-मरने की कसमें खाईं.

जेल प्रशासन के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि गया जिले के बोधगया विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के नवरनचक गांव के निवासी स्वर्गीय सीताराम यादव के छोटे बेटे मोनारिक यादव को करीब 12 वर्ष पूर्व न्यायालय ने अपने सगे भाई रामजतन यादव की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उसे यह सजा उसकी भाभी मालो देवी के बयान के कारण मिली थी.

मालो ने 12 साल बहुत मुश्किल से गुजारे. मालो का कहना है कि पति के गुजर जाने का गम कोई विधवा ही बता सकती है. अब मालो का फिर से विवाह हो गया है. विवाह से प्रसन्न मालो कहती है कि अब शायद उसके जीवन में एक बार फिर खुशियां लौट आएं. इधर, मोनारिक का कहना है कि यह विडंबना ही है कि जिस महिला के सुहाग उजाड़ने के आरोप में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई, उसी के साथ वह अब सारी जिंदगी गुजारेगा.

जेल अधीक्षक एस़ क़े अम्बष्ट ने भी नवदंपति को आशीर्वाद दिया और उनके उज्‍जवल भविष्य की कामना की. वे कहते हैं कि बिहार में जेल के इतिहास में संभवत: इस तरह की यह पहली घटना है.

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व मुक्त जेल में ही उम्रकैद की सजा काट रहे राजपुर थाने के सगरा निवासी जनार्दन कमकर ने अपनी बिटिया सुनीता की शादी जेल में ही रचाई थी. मुक्त जेल में सजा के बाकी दिन काट रहे कैदियों की इन अनूठी पहल की हर तरफ चर्चा है. सरकार ने कैदियों का जीवन सुधारने के लिए मुक्त जेल का निर्माण कराया है.

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