बीजेपी के महाराजगंज के सांसद जनार्धन सिंह सिग्रीवाल को पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को बडी राहत दी है. कोर्ट ने पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के उस दावे को खारिज कर दिया. जिसमें कहा गया था, कि जनार्धन सिंह सिग्रीवाल ने अपने चुनावी ऐफेडेविट में एक क्रिमिनल केस को छिपा लिया था. इस आधार पर उनकी लोकसभा की सदस्यता रद्द की जाए.
जनार्धन सिंह सिग्रीवाल 2014 में पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को हरा कर लोकसभा पहुंचे थे. उन्होंने अपने नामांकन के दौरान दिए गए ऐफिडेविट में अपने खिलाफ चार अपराधिक मामलों का जिक्र तो किया था. लेकिन 1986 के एक अपराधिक मामले का जिक्र करना ही भूल गए.
जिन चार अपराधिक मामलों का जिक्र है, उसमें सभी राजनैतिक धऱना प्रदर्शन से जुडे हुए थे. लेकिन इससे पहले भी सिग्रावाल चार दफ्ते विधानसभा का चुनाव लड चुके थे, उसमें भी वो 1986 के मामलों का जिक्र अपने ऐफिडेविट में नही किया था.
प्रभुनाथ सिंह ने भगवान पुर बाजार केस नम्बर 46/86 को आधार बनाकर सिग्रीवाल की लोकसभा सदस्यता रद्द करने के लिए याचिका 2014 दायर किया था. तीन साल की सुनवाई के बाद कोर्ट ने दलील दी की जानकारी के अभाव में सिग्रीवाल ने ऐफेडेविट में जिक्र नही कर पाए ऐसे में 3 साल बाद सदस्यता रद्द करने की कोई जरूरत नही है.
सिग्रीवाल के वकील एस डी संजय का कहना है कि प्रभुनाथ सिंह कोर्ट में ये साबित नही कर सके कि सिग्रीवाल ने जानबूझ कर इस केस का जिक्र नही किया था. ऐसे में कोर्ट ने प्रभुनाथ सिंह की याचिका को खारिज कर दिया.
पटना हाईकोर्ट का यह निर्णय बीजेपी के लिए राहत लेकर आया है क्योंकि पटना हाईकोर्ट ने ही इससे पहले सासाराम के बीजेपी सांसद छेदी पासवान की सदस्यता रद्द कर दी थी जिसकी वजह से वो राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में वोट नही डाल सके.