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LJP के अध्यक्ष चुने गए पशुपति पारस, पटना बैठक में नेशनल काउंसिल ने लगाई मुहर

लोक जनशक्ति पार्टी में जारी वर्चस्व की जंग के बीच पशुपति पारस को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया है. पटना में हुई पार्टी की नेशनल काउंसिल की मीटिंग में ये फैसला हुआ है.

लोजपा के सांसद पशुपति पारस (PTI) लोजपा के सांसद पशुपति पारस (PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लोजपा में चाचा और भतीजे की जंग जारी
  • पशुपति पारस को नया पार्टी अध्यक्ष चुना गया
  • चिराग पासवान ने खुद को बताया था अध्यक्ष

बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से लगातार हलचल जारी है. लोक जनशक्ति पार्टी में इस वक्त वर्चस्व की जंग चल रही है. पशुपति पारस और चिराग पासवान के गुट आमने-सामने हैं. तमाम विवादों के बीच गुरुवार को पशुपति पारस को पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है. शाम पांच बजे अब पशुपति पारस प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे. 

गुरुवार को पटना में पशुपति पारस के नेतृत्व में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ये फैसला लिया गया. इस बैठक में पशुपति पारस गुट के चार सांसद महबूब अली कैसर, वीणा देवी, चंदन सिंह और प्रिंस राज भी शामिल रहे.

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पटना में यह बैठक के लोक जनशक्ति पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजभान सिंह के आवास पर हुई. सूरजभान को ही पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई थी. 

पशुपति पारस बुधवार को ही पटना पहुंच गए थे, गुरुवार को उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया. जब किसी अन्य नेता ने विरोध नहीं किया, तो उन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया. इससे पहले उन्हें संसदीय दल का नेता भी चुना गया था. 

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चिराग भी खुद को अध्यक्ष होने का कर रहे हैं दावा
वहीं, दूसरी तरफ चिराग पासवान ने भी लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने का दावा करते हुए अपने विश्वसनीय राजू तिवारी को बिहार प्रदेश लोजपा का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया है. पशुपति पारस गुट और चिराग पासवान दोनों ने लोजपा के ऊपर दावेदारी कर दी है और ऐसे में यह झगड़ा चुनाव आयोग या कोर्ट में जाना तय माना जा रहा है.

जिस रास्ते चल पड़ा, अब वापसी मुश्किल नहीं: पशुपति पारस

चाचा और भतीजे के बीच छिड़ी जंग कब और कैसे खत्म होगी ये साफ नहीं है. लेकिन पशुपति पारस ने साफ कह दिया है कि अब उनकी वापसी मुश्किल है. लोक जनशक्ति पार्टी संसदीय दल के नेता पशुपति पारस ने कहा है कि अब जिस रास्ते पर चल पड़े हैं, उससे पीछे वापस आने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है.

आपको बता दें कि पशुपति पारस समेत कुल पांच सांसदों ने अलग रुख अपना लिया है. पांचों की ओर से पशुपति पारस को संसदीय दल का नेता चुना गया है, जिसे लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने मंजूरी दी है. 

हालांकि, चिराग पासवान ने बीते दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि पार्टी का अध्यक्ष ही संसदीय दल का नेता चुन सकता है. ऐसे में सभी फैसले गलत हैं. चिराग पासवान का कहना है कि पहले वह लड़ाई को घर में सुलझाना चाहते थे, लेकिन अब कानूनी जंग लड़ने के लिए भी तैयार हैं. 


 

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