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बिहार में शराब फैक्ट्रियां बंद करने का फैसला विपक्ष की जीत: बीजेपी

दरअसल नीतीश कुमार ने 1 अप्रैल 2016 से राज्य में शराब बंदी तो लागू कर दिया मगर राज्य में ऐसे कई सारे बनाने वाली फैक्ट्रीयां थी, जिन को बंद नहीं किया गया था. ऐसे में विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था कि जब राज्य में शराबबंदी लागू है तो फिर शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों को बंद क्यों नहीं किया जा रहा है?

बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी

बीजेपी ने 1 अप्रैल से राज्य में शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों को बंद करने के नीतीश कुमार सरकार के फैसले को विपक्ष की बड़ी जीत माना है. दरअसल नीतीश कुमार ने 1 अप्रैल 2016 से राज्य में शराब बंदी तो लागू कर दिया मगर राज्य में ऐसे कई सारे बनाने वाली फैक्ट्रीयां थी, जिन को बंद नहीं किया गया था. ऐसे में विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था कि जब राज्य में शराबबंदी लागू है तो फिर शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों को बंद क्यों नहीं किया जा रहा है?

बीजेपी का मानना है कि नीतीश कुमार विपक्ष के दबाव के आगे झुक कर शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों को 1 अप्रैल 2017 से बंद करने का फैसला किया है. राज्य सरकार के फैसले के अनुसार 1 अप्रैल 2017 से इन शराब बनाने वाली कंपनियों के लाइसेंस का नवीकरण नहीं होगा.

बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा, 'यह विपक्ष की बड़ी जीत है, जिसके फलस्वरूप शराब की 21 फैक्ट्रियों के लाइसेंस का नवीकरण अब नहीं होगा. आगामी 21 जनवरी को मानव श्रृंखला बनवाने से पहले नीतीश को नए शराबबंदी कानून के तालिबानी प्रावधानों को समाप्त करने की घोषणा भी अब करनी चाहिए.'

बीजेपी ने कहा कि शराब बरामद होने पर परिवार के सभी व्यस्कों को जेल, संपत्ति जब्ती मन लगाने जैसे प्रावधानों को हटाने पर सर्वदलीय बैठक में सहमति बनी थी लेकिन सवा महीने बाद यह मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं. ऐसे में 21 जनवरी को शराबबंदी के समर्थन में मानव श्रृंखला बनाने के कार्यक्रम से पहले बीजेपी ने मांग की है कि नीतीश कुमार को नए शराबबंदी कानून के तालिबानी प्रावधानों को वापस लेना चाहिए.

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