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JDU का तंज- लालू परिवार की बेनामी संपत्तियों के संरक्षक बनना चाहते हैं शरद यादव

शरद यादव पर हमला बोलते हुए नीरज कुमार ने कहा कि शरद यादव को इस बात का एहसास हो चुका है कि लालू और उनका पूरा परिवार भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाएगा और इसीलिए वह उनकी तमाम बेनामी संपत्तियों के संरक्षक बनने के लिए आतुर हैं.

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शरद यादव और लालू यादव शरद यादव और लालू यादव

चुनाव आयोग में असली जनता दल यूनाइटेड गुट होने का दावा करने वाले पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद शरद यादव को चुनाव आयोग ने उस वक्त झटका दिया, जब उसने शरद यादव के खेमे को असली जनता दल यूनाइटेड मानने से इनकार कर दिया. मंगलवार को हुए चुनाव आयोग के फैसले के बाद जेडीयू ने शरद यादव को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और उन पर हमला भी तेज कर दिया है. इसी क्रम में जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने शरद यादव पर तंज कसते हुए कहा है कि वह आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके परिवार की बेनामी संपत्तियों के संरक्षक बनना चाहते हैं.

जेडीयू का शरद यादव पर हमला

शरद यादव पर हमला बोलते हुए नीरज कुमार ने कहा कि शरद यादव को इस बात का एहसास हो चुका है कि लालू और उनका पूरा परिवार भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाएगा और इसीलिए वह उनकी तमाम बेनामी संपत्तियों के संरक्षक बनने के लिए आतुर हैं. नीरज ने कहा कि लालू के दोनों बेटों तेजस्वी और तेजप्रताप के पॉलिटिकल अंकल बनने के बाद शरद यादव के ऊपर उनकी राज्यसभा की सदस्यता जाने का भी खतरा मंडरा रहा है.

शरद को RJD में शामिल होने की नसीहत

जेडीयू के बागी नेता शरद यादव को नसीहत देते हुए नीरज कुमार ने कहा कि वे लालू प्रसाद की पार्टी में शामिल हो जाएं या फिर अपनी खुद की पार्टी बना लें क्योंकि बिहार की जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया है. शरद पर तंज कसते हुए नीरज ने कहा कि शरद यादव को जल्द से जल्द ना केवल लालू की पार्टी में सदस्यता लेनी चाहिए बल्कि अपने साथ-साथ जेडीयू के और बागी नेता अली अनवर, रमई राम और अर्जुन राय को भी लालू की पार्टी में शामिल करा देना चाहिए.

महागठबंधन टूटने से नाराज शरद यादव

गौरतलब है कि जिस तरीके से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जुलाई के महीने में महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ नई सरकार बना ली, उससे शरद यादव काफी नाराज हैं और उन्होंने कई मौकों पर नीतीश कुमार के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. नीतीश के इस फैसले को शरद यादव ने 2015 में बिहार के जनादेश का अपमान बताया है.

राज्यसभा सदस्यता खत्म करने की मांग

वहीं दूसरी तरफ, शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता के लिए जनता दल यूनाइटेड ने राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात करके उनकी राज्यसभा की सदस्यता खत्म करने की मांग की है.

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