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बिहार में कोरोना टेस्टिंग में गड़बड़ीः एक ही मोबाइल नंबर पर 26 लोगों की जांच

बिहार में कोरोना जांच की संख्या को बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी मोबाइल नंबर से लेकर फर्जी लोगों के नाम का इस्तेमाल किया गया है. मामला तूल पकड़ने के बाद विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है.

कोरोना टेस्टिंग में घोटाले की खबर (फाइल फोटो) कोरोना टेस्टिंग में घोटाले की खबर (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एक ही फोन नंबर पर 26 लोगों की कोरोना टेस्टिंग
  • जिसका नंबर है उसने कभी कोरोना टेस्ट कराया ही नहीं
  • स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं

बिहार में कोरोना की जांच में किस तरीके से बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है इसको लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है. आजतक के हाथ जो दस्तावेज लगे हैं उससे साफ है कि बिहार में कोरोना जांच की संख्या को बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी मोबाइल नंबर से लेकर फर्जी लोगों के नाम का इस्तेमाल किया गया है. इस बात की भी जानकारी मिली है कि रजिस्टर में हेराफेरी करके कोरोना की जांच के किट से मुनाफा कमाया गया.

बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना हेरा-फेरी का केंद्र

आजतक के हाथ जो दस्तावेज लगे हैं उसके मुताबिक बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ऐसा भी गड़बड़झाला सामने आया है जहां पर जिन 26 लोगों की जांच हुई थी उनका मोबाइल नंबर (88######90) एक ही है . दिलचस्प बात यह है कि ये मोबाइल नंबर एक दिहाड़ी मजदूर का है जो कि बांका जिले में रहता है.

आजतक से फोन पर बातचीत करते हुए बैजू रजक ने बताया “मेरा नाम राजू रजक है और मैं बांका जिले में रहता हूं. मैंने आज तक अपनी कोरोना का जांच नहीं कराई है.”

यह 26 लोग जिनका मोबाइल नंबर एक ही है उनमें से 11 पुरुष, 6 महिलाएं और 9 बच्चे हैं. बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही एक ऐसा मामला और सामने आया है. इसमें जिन 11 लोगों की जांच का दावा किया गया है उनका मोबाइल नंबर भी एक ही है. 

इस पूरे गड़बड़ झाले के सामने आने के बाद आनन-फानन में जमुई जिला अधिकारी के निर्देश पर बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच टीम पहुंची और पूरे मामले की तफ्तीश शुरू की. वहीं स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा है कि उन्हें कोरोना की संख्या में हेराफेरी के बारे में जानकारी नहीं है. मंगल पांडे स्वास्थ्य मंत्री ने आजतक से कहा “मुझे मामले की जानकारी नहीं है. पहले इस पूरे मामले की जानकारी प्राप्त कर लेता हूं”

इस मामले पर आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा “इस पूरे मामले में बड़े पैमाने पर फर्जी लोगों के नाम देकर पैसे डकारे गए हैं. फर्जी नाम और फर्जी मोबाइल नंबर सब दिखाया गया है. बिहार में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है. हम लोग मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए”

वहींं तेजस्वी यादव ने कहा है कि मैंने पहले ही बिहार में कोरोना घोटाले की भविष्यवाणी की थी. जब हमने घोटाले का डेटा सार्वजनिक किया था तो CM ने हमेशा की तरह नकार दिया. 

इन्होंने अधिकारी बदल Anti-gen का वो “अमृत” मंथन किया कि 7 दिनों में प्रतिदिन टेस्ट का आंकड़ा 10 हज़ार से 1 लाख और 25 दिनों में 2 लाख पार करा दिया।

बिहार में 9 फरवरी तक कुल 2 करोड़ 16 लाख 64 हजार 852 लोगों की कोरोना जांच हुई है. बिहार में 9 फरवरी तक कुल 2,61,447 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं. बिहार में कोरोना से 1518 लोगों की मौत हुई है.

 

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