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डीवाई पाटिल बने बिहार के नए राज्यपाल

महाराष्ट्र के प्रख्यात शिक्षाविद डीवाई पाटिल ने बिहार के राज्यपाल के रूप में शुक्रवार को पटना स्थित राजभवन में आयोजित एक समारोह में शपथ ली.

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डी वाई पाटिल डी वाई पाटिल

महाराष्ट्र के प्रख्यात शिक्षाविद डीवाई पाटिल ने बिहार के राज्यपाल के रूप में शुक्रवार को पटना स्थित राजभवन में आयोजित एक समारोह में शपथ ली. पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रेखा एम दोसित ने 77 वर्षीय ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल को बिहार के 34 वें राज्यपाल के रूप में शपथ दिलाई.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, राज्य के कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. बीते नौ मार्च को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने पाटिल को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया था. वह त्रिपुरा के राज्यपाल थे. उनके स्थान पर बिहार के पूर्व राज्यपाल देवानंद कुंवर को त्रिपुरा स्थानांतरित किया गया है.

पाटिल महाराष्ट्र के एक जाने माने शिक्षाविद हैं. उन्होंने कई इंजीनियरिंग कालेजों की स्थापना महाराष्ट्र में की है. 22 अक्‍टूबर 1935 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में जन्मे पाटिल को समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1991 में पदमश्री से सम्मानित किया गया था.

महाराष्ट्र में मनसे द्वारा बिहारियों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की पिटाई के कारण दोनों राज्यों के बीच संबंध खराब रहने के बावजूद महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से 200 से अधिक लोगों ने यहां आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया.

कार्यक्रम के बाद कांग्रेस के मुंबई की कांग्रेस समिति के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने कहा कि पाटिल की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति और बड़ी संख्या में महाराष्ट्र के लोगों का यहां कार्यक्रम में भाग लेना इस बात को साबित करता है कि दोनों राज्यों के लोगों के बीच प्यार है.

उन्होंने कहा कि कुछ मुट्ठीभर लोग ही राजनीतिक फायदे के लिए हिंसा फैलाते हैं. महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में लोग बिहारियों से प्रेम करते हैं. प्रसिद्ध अणे मार्ग जहां मुख्यमंत्री का आवास है, मराठी व्यक्ति और पूर्व राज्यपाल माधव श्रहरि अणे के नाम पर है. अणे के बाद पाटिल के महाराष्ट्र से राज्यपाल नियुक्त होने वाले चौथे राज्यपाल हैं. इससे पहले डी भंडारकर और आरएस गवई भी यहां राज्यपाल रह चुके हैं.

राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद पाटिल को पूर्व राज्यपाल सह कुलाधिपति देवानंद कुंवर द्वारा विभिन्न विश्वविद्यालयों में की गयी कुलपतियों और प्रतिकुलपतियों की विवादस्पद नियुक्तियों के पृष्ठभूमि का भी सामना करना पडेगा. उच्चतम न्यायलय ने कुंवर द्वारा नियुक्त नौ कुलपतियों और दो प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी है. कुंवर और बिहार सरकार के बीच इस मुद्दे को लेकर अंत तक टकराव की स्थिति बनी रही थी. बाद उन्हें त्रिपुरा का राज्यपाल बनाया गया.

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