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Danapur: कोरोना काल में गरबा, लोगों ने इस तरह खेला डांडिया

दानापुर के दुर्गा अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने इस बार नवरात्र के मौके पर डांडिया नाइट का आयोजन अपने ही अपार्टमेंट के अंदर बने मंदिर के प्रांगण में आयोजित किया है. इस आयोजन में महिलाएं डांडिया नाइट में गरबा नृत्य और डांडिया के साथ झूमती नजर आ रही हैं.

मां को प्रसन्न करने के लिए किया जाता गरबा नृत्य. मां को प्रसन्न करने के लिए किया जाता गरबा नृत्य.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मां को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है गरबा नृत्य
  • अपार्टमेंट के अंदर बने मंदिर के प्रांगण में आयोजन
  • महिलाएं डांडिया नाइट में डांडिया के साथ झूमती नजर आईं

दुर्गा पूजा हो और डांडिया न हो तो मां की पूजा अधूरी लगती है. ऐसा माना जाता है कि गरबा नृत्य मां दुर्गा को काफी पसंद होता है. उनको प्रसन्न करने के लिए गरबा नृत्य किया जाता है. लेकिन इस बार कोरोना भी है, सरकार की गाइडलाइन भी है. इसको ध्यान में रखते हुए बिहार के दानापुर के दुर्गा अपार्टमेंट के लोगों का इस नवरात्र में डांडिया का नजारा कुछ अलग ही देखने को मिल रहा है.

दानापुर के दुर्गा अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने इस बार नवरात्र के मौके पर डांडिया नाइट का आयोजन अपने ही अपार्टमेंट के अंदर बने मंदिर के प्रांगण में आयोजित किया है. इस आयोजन में महिलाएं डांडिया नाइट में गरबा नृत्य और डांडिया के साथ झूमती नजर आ रही हैं. एक के बाद एक फिल्मी भक्ति गानों पर डांडिया खेल रही हैं और माता की भक्ति में लीन हैं.

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सीमा केसरी बताती हैं कि डांडिया के माध्यम से माता रानी को खुश करना है. इस बार कोरोना चल रहा है बाहर हम लोग को जाना नहीं है. इसलिए हम लोग अपनी सोसाइटी में ही एन्जॉय कर रहे हैं. कोरोना महामारी से भी बचना है और गाइडलाइन का पालन भी करना है. सीमा केसरी बताती हैं कि यह खेल माता रानी को खुश करने के लिए अब एक दो जगह पर ही नहीं अब पूरे हिंदुस्तान में खेला जाता है. 

गुजरात की रहने वाली हनी रॉकी सिंह बताती हैं कि दशहरा में माता रानी पधारी हैं और कहा जाता है कि दशहरा के मौके पर डांडिया नहीं खेला तो क्या खेला.

घट स्थापना के साथ ही शुरू हो जाता गरबा
नवरात्रि में गरबा और डांडिया का भी एक अलग ही मजा होता है. बिना गरबा के नवरात्र भी अधूरा है. इस दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इसके रंग में रंगे दिखाई देते हैं. गरबा का आरंभ घट स्थापना के साथ ही शुरू हो जाता है. दिया जलाकर इसकी शुरुआत होती है. इसे दीपगर्भ के नाम से भी जाना जाता है. (इनपुट-मनोज सिंह.)

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