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नए लेवल पर पहुंचा चाचा बनाम भतीजा वाद-विवाद, सड़क से लेकर सदन तक बार-बार मिलेगी चुनौती

मोदी लहर पर सवार होकर नीतीश कुमार ने 31 साल के तेजस्वी के तेज को मात तो दे दी, लेकिन आगे की राह कांटे भरी है, क्योंकि सियासत का संघर्ष सिर्फ विरोधियों के साथ ही नहीं बल्कि घर के अंदर भी है.

बिहारः सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो) बिहारः सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नीतीश-तेजस्वी की तीखी नोकझोंक जारी
  • बिहार की सियासत को बदल गया समीकरण
  • पहली बार नीतीश के सामने है मजबूत विपक्ष

बिहार के चुनावी रण में जो तीखी जुबानी जंग नीतीश कुमार और तेजस्वी में दिखी उसका अगला संस्करण शुक्रवार को विधानसभा में दिखा. इस जुबानी जंग में चाचा बनाम भतीजा से शुरू हुआ वाद-विवाद अब नए लेवल पर पहुंच चुका है. चुनावी रैलियों में तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला था और उन हमलों से कई बार रैलियों में नीतीश कुमार झुंझलाए और तिलमिलाए हुए भी नजर आए थे. 

मोदी लहर पर सवार होकर नीतीश कुमार ने 31 साल के तेजस्वी के तेज को मात तो दे दी, लेकिन आगे की राह कांटे भरी है, क्योंकि सियासत का संघर्ष सिर्फ विरोधियों के साथ ही नहीं बल्कि घर के अंदर भी है. विधानसभा के फर्स्ट-डे, फर्स्ट-शो के दौरान विपक्ष की नीति और नीयत दोनों नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती है और उन्हें हर दिन कड़े और बड़े इम्तिहान से गुजरना है.

पहली बार मजबूत विपक्ष से सामना

ये पहली बार है जब नीतीश कुमार का सामने सबसे मजबूत विपक्ष से हो रहा है. विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में नीतीश का पहला इम्तेहान हुआ, जिसमें नीतीश कुमार पास हो गए, लेकिन नीतीश भी समझ चुके हैं कि मजबूत विपक्ष सामने अड़ा और खड़ा है. संख्याबल में भी विधानसभा में तेजस्वी ब्रिगेड मोर्चा संभालने के लिए कमजोर नहीं है, यानी अब नीतीश कुमार को सड़क से लेकर सदन तक बार-बार चुनौती मिलेगी.

7वीं बार बिहार की सत्ता के सर्वोच्चय पद पर बैठे

बिहार इलेक्शन में ये पहला मौका था जब 69 साल के नीतीश कुमार की सीधी भिड़ंत 31 साल के तेजस्वी यादव से हुई. चुनावी गेम के नियम बदले हुए थे, पिच पॉलिटिक्स की थी, लेकिन बैटिंग और फिल्डिंग करने वाला विरोधी टीम का कप्तान एकदम अलग था. नीतीश कुमार 7वीं बार बिहार की सत्ता के सर्वोच्चय पद पर बैठे हैं, लेकिन इस राह के हर मोड़ पर तेजस्वी रोड़ा बनकर खड़े हैं. 

अतीत के रिश्तों से आजाद

तेजस्वी के तेवर बता रहे हैं कि सियासत में जारी अदावत में अब अतीत के रिश्तों से वो आजाद हैं. अब न एहसान की बात होगी न पुरानी पहचान की. याद करिए चुनावी रण में तेजस्वी यादव की वो भविष्यवाणी जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार की एक्सपायरी डेट का ऐलान किया था. तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को संन्यास लेने की सलाह दी थी, तब नीतीश कुमार ने अपने स्टाइल में जवाब दिया था और कहा था कि तेजस्वी से पॉलिटिकल ज्ञान लेने की जरूरत नहीं है. 

सदन मेंं तीखी नोकझोंक 

इसी कड़ी में शुक्रवार को विधानसभा के अंदर तेजस्वी यादव पर सीएम नीतीश कुमार आगबबूला हो गए. दरअसल, सदन में तेजस्वी ने सीएम पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह 1991 में हुई एक हत्या के मामले में शामिल हैं. साथ ही तेजस्वी ने नीतीश के ऊपर कंटेंट चोरी के मामले में उन पर लगे 25 हजार रुपये जुर्माने का भी जिक्र करते उन्हें घेरा था. इस पर सीएम ने तेजस्वी यादव को जमकर खरी-खोटी सुनाई. 

तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री के सामने शुचिता की बात आती है तो हमने हमेशा उनका सम्मान किया है. उन्हें चाचा कहकर संबोधित किया, लेकिन उन्होंने मेरे माता-पिता के बारे में क्या कहा, बेटे की चाह में बेटियां पैदा करते रहे. हम दो भाई के बाद एक बहन भी है. मैंने तो उन्हीं के बातों को कहा कि एक पुत्र के बाद उन्होंने कोई बच्चा पैदा नहीं किया, कहीं बेटी ना हो जाए. 

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