समस्तीपुर लोकसभा उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के भतीजे और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) प्रत्याशी प्रिंसराज ने जीत दर्ज की है तो दूसरी ओर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने बिहार में अपना खाता खोल लिया. इस पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार विधानसभा की पांच सीटों पर हुए उपचुनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है.
उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि कांग्रेस का खाता नहीं खुला. दरौंदा में एनडीए के विद्रोही प्रत्याशी ने जीत पायी जबकि वहां राजद तीसरे स्थान पर रहा. नाथनगर में एनडीए का उम्मीदवार जीता. समस्तीपुर लोकसभा सीट जीत कर तो हमने संसदीय चुनाव की सफलता दोहराई.
बीजेपी का नहीं खुला खाता
जबकि इस उपचुनाव में कांग्रेस एक सीट किशनगंज से चुनाव लड़ी थी. वहीं से बीजेपी ने भी अपना-अपना एकमात्र उम्मीदवार उतारा था पर ओवैसी की पार्टी की जीत हुई. ऐसे में कांग्रेस के साथ साथ बीजेपी का खाता नहीं खुल पाया. वहीं सुशील कुमार मोदी अब अब दरौंदा के उस उम्मीदवार की जीत को एनडीए की जीत बता रही है जिसे बीजेपी बागी उम्मीदवार होने के कारण पार्टी से निकाल चुकी है.
बिहार विधानसभा की पांच सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस का खाता नहीं खुला। दरौंदा में एनडीए के विद्रोही प्रत्याशी ने जीत पायी जबकि वहां राजद तीसरे स्थान पर रहा। नाथनगर में एनडीए का उम्मीदवार जीता। समस्तीपुर लोकसभा सीट जीत कर तो हमने संसदीय चुनाव की सफलता दोहरायी।
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— Sushil Kumar Modi (@SushilModi) October 24, 2019
इन सब के बीच सुशील कुमार मोदी को एहसास भी हुआ कि कुछ कमी तो जरूर रही है तभी तो ऐसे नतीजे आये हैं. जिसकी वजह से उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सबसे ऊपर है, इसलिए इसकी गहन समीक्षा की जाएगी और जो कमी रह गई है, उसे जल्द ही दूर कर लिया जाएगा.
सुशील मोदी का दूसरा ट्वीट
सुशील मोदी ने आने ट्वीट में आगे लिखा है कि वर्ष 2009 में बिहार की पहली एनडीए सरकार के समय विधानसभा की 18 सीटों पर हुए उपचुनाव में दो तिहाई सीटों पर विरोधी दलों के उम्मीदवार जीते थे, लेकिन साल भर बाद 2010 में जब आम चुनाव हुआ, तब एनडीए ने तीन चौथाई बहुमत के साथ सरकार में वापसी की थी. वह शानदार जीत ऐसी थी कि कई चुनाव-पूर्व अनुमान धराशायी हो गए थे.
वर्ष 2009 में बिहार की पहली एनडीए सरकार के समय विधानसभा की 18 सीटों पर हुए उपचुनाव में दो तिहाई सीटों पर विरोधी दलों के उम्मीदवार जीते थे, लेकिन साल भर बाद 2010 में जब आम चुनाव हुआ, तब एनडीए ने तीन चौथाई बहुमत के साथ सरकार में वापसी की थी। वह शानदार जीत ऐसी थी कि कई चुनाव-पूर्व.. pic.twitter.com/x93IOGCKIU
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इसमें मोदी ये भूल गए कि उस समय बिहार में एनडीए की सरकार के 5 वर्ष हुए थे लेकिन अब 15 साल होने जा रहे हैं फिर भी मोदी का कहना है कि संसदीय राजनीति में उपचुनाव इतने स्थानीय मुद्दों पर होते हैं कि इनके परिणाम न मुख्य चुनाव को प्रभावित करते हैं, न कोई विश्वसनीय संकेत साबित होते हैं. हमें पूरा भरोसा है कि एनडीए 2020 में 2010 की सफलता दोहरायेगा.