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बिहार: ईंट भट्ठे की चिमनी के लिए खोदे गए गड्ढे में भरा पानी, डूबने से पांच बच्चों की मौत

घटना की जानकारी जैसे ही स्थानीय पुलिस को मिली वो मौके पर पहुंचे भी और जांच भी शुरू कर दी गई है. अब किसके स्तर पर ये लापरवाही रही है ये जानने के लिए  एसडीओ और एसडीपीओ जांच में जुट गए हैं

बिहार में डूबने से पांच बच्चों की मौत ( सांकेतिक फोटो-पीटीआई) बिहार में डूबने से पांच बच्चों की मौत ( सांकेतिक फोटो-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पांच बच्चों की डूबने से मौत
  • दुर्घटना या फिर लापरवाही, जांच जारी

बिहार के सहरसा से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पर पांच बच्चे एक पानी के गड्ढे में डूबने से मर गए. सभी बच्चों की उम्र से 8 से 12 साल के बीच में बताई जा रही है. ये घटना सहरसा बस्ती वार्ड 39 की है जहां पर ईंट भट्ठा चिमनी के लिए गड्ढा खोदा गया था. लेकिन जब बारिश की वजह से उस गड्ढे में पानी भर गया तो कुछ बच्चे वहां नहाने चले गए और वे उसमें डूब गए.

पांच बच्चों की डूबने से मौत

घटना की जानकारी जैसे ही स्थानीय पुलिस को मिली वो मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी. अब किसके स्तर पर ये लापरवाही रही है, ये जानने के लिए  एसडीओ और एसडीपीओ जांच में जुट गए हैं और सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है. लेकिन ऐसी घटना का होना ही प्रशासन पर कई तरह के सवाल खड़े कर जाता है.

अगर ईंट भट्ठा चिमनी के लिए कोई गड्ढा खोदा भी गया था तो क्या वहां पर किसी तरह का बोर्ड लगा था? क्या स्थानीय लोगों को इस बात की जानकारी दी गई थी? छोटे-छोटे बच्चे जब उस पानी में नहाने गए थे तब क्या कोई रोकने वाला नहीं था? 

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दुर्घटना या फिर लापरवाही?

अगर समय रहते इन सवालों के जवाब मिल जाते तो वो पांच बच्चे अपनी जान नहीं गंवाते. लेकिन क्योंकि प्रशासन की तरफ से लापरवाही बड़ी रही और स्थानीय लोगों ने भी ध्यान नहीं दिया, इस वजह से ये दिल दहला देने वाली घटना हो गई. अभी के लिए इलाके में मातम पसरा हुआ है और परिवार सिर्फ न्याय की गुहार लगा रहे हैं. अपने बच्चों को खोने का दर्द परिजनों के चेहरे पर साफ महसूस किया जा सकता है. सभी सिर्फ रो रहे हैं और प्रशासन की लापरवाही पर गुस्सा हो रहे हैं.

लेकिन ये पहली बार नहीं है जब किसी गड्ढे में डूबने से किसी की मौत हुई हो. क्या बिहार क्या देश का दूसरा कोई राज्य, ऐसे घटनाएं सभी जगह घटित होती हैं, प्रशासन की लापरवाही भी जगजाहिर दिखती है, लेकिन न्याय कम ही बार होता दिखता है और मासूम लोग ऐसे ही अपनी जान गंवाते रहते हैं.

(धीरज सिंह के इनपुट के साथ)

 

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