कोविड-19 महामारी के दौरान 2 दिन पहले बिहार सरकार में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार का तबादला पर्यटन विभाग में कर दिया. कोविड-19 महामारी के दौरान संजय कुमार के अचानक तबादले को लेकर कई सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं. सवाल उठ रहे हैं कि बिहार में जब कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, तो ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को उनके पद से हटाने की क्या जरूरत पड़ी?
कोरोना पर फुल कवरेज के लिए यहां क्लिक करें
ऐसे में पिछले कुछ दिनों के दौरान के घटनाक्रम पर नजर डालें तो लगता है कि संजय कुमार को उनके पद से हटाने की पटकथा लॉकडाउन शुरू होने के बाद से तैयार होने लगी थी.
पीएमसीएच के डॉक्टर को किया था सस्पेंड
कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद संजय कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नजर में सबसे पहले तब चढ़ गए जब लॉकडाउन 1.0 के दौरान उन्होंने पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. सत्येंद्र नारायण सिंह को सस्पेंड कर दिया था.
डॉ. सत्येंद्र नारायण सिंह के खिलाफ आरोप था कि कोविड-19 के सैंपल टेस्टिंग में पीएमसीएच का माइक्रोबायोलॉजी विभाग काफी शिथिल था और जांच में तेजी नहीं आ पा रही थी. इसी को लेकर संजय कुमार ने डॉ. सत्येंद्र नारायण सिंह को निलंबित कर दिया.
कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...
जानकारी के मुताबिक, संजय कुमार की इस कार्रवाई से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी नाराज थे और 5 दिन के अंदर ही डॉ सत्येंद्र नारायण सिंह का निलंबन राज्य सरकार ने रद्द कर दिया.
362 डॉक्टरों को शो कॉज नोटिस जारी किया
इसके बाद संजय कुमार ने पूरे बिहार में 362 ऐसे डॉक्टरों की लिस्ट तैयार की थी जो कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी ड्यूटी से नदारद थे. संजय कुमार ने इन सभी डॉक्टरों को शो कॉज नोटिस जारी किया था और इनके खिलाफ कार्रवाई करने के मूड में थे. बताया जाता है कि डॉक्टरों की यह लॉबी भी संजय कुमार को उनके पद से हटाने में काफी हावी रही.
रोजाना 10000 सैंपल टेस्टिंग नहीं होना!
कुछ दिनों में बिहार में जिस तरीके से कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं उसको लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग को रोजाना 10000 टेस्टिंग करने के निर्देश जारी किए थे, मगर इसके बावजूद भी रोजाना केवल 2500-2700 सैंपल की टेस्टिंग हो पा रही थी. इसको लेकर भी नीतीश कुमार काफी नाराज थे, क्योंकि हाल के दिनों में प्रवासी मजदूरों के बिहार लौटने के बाद से कोविड-19 मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से अनबन
बताया जाता है कि संजय कुमार की स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से कभी भी नहीं बनती थी. सोशल मीडिया पर संजय कुमार जो कोविड-19 को लेकर जानकारियां साझा कर रहे थे और मंगल पांडे भी अपने लेवल पर जो जानकारियां साझा कर रहे थे उन दोनों जानकारियों में काफी असमानता थी. इसको लेकर भी बिहार सरकार की काफी किरकिरी हो रही थी.
निजी टि्वटर हैंडल से जानकारियां साझा करना
कोविड-19 महामारी के दौरान भी मीडिया से जानकारियां साझा करने को लेकर संजय कुमार के काफी एक्टिव थे. महामारी को लेकर बारीक से बारीक जानकारियां भी संजय कुमार अपने निजी टि्वटर हैंडल के जरिए साझा किया करते थे. यह बात भी सरकार के बड़े आला अधिकारियों को खटक रही थी कि आखिर स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए जानकारियां साझा ना करके संजय कुमार अपने निजी टि्वटर हैंडल के जरिए जानकारियां क्यों साझा कर रहे थे? बता दें कि पिछले 1 महीने में संजय कुमार के टि्वटर फॉलोवर्स की संख्या में तकरीबन 30,000 की बढ़ोतरी हुई है.
देश-दुनिया के किस हिस्से में कितना है कोरोना का कहर? यहां क्लिक कर देखें