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नीतीश सरकार ने नया शराबबंदी का कानून किया लागू, HC ने हटाई थी पाबंदी

नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार बिहार को शराबमुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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नीतीश कुमार नीतीश कुमार

पटना हाई कोर्ट द्वारा शराबबंदी कानून को निरस्त किए जाने के बाद आखिरकार बिहार सरकार ने रविवार से बिहार में नया शराबबंदी कानून लागू कर दिय. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट से बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 को बिहार में लागू करने की मुहर लगते ही इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई. कैबिनेट की बैठक में बिहार को शराबमुक्त राज्य बनाने का संकल्प भी लिया. यही नहीं सरकार हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का भी फैसला किया.

नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार बिहार को शराबमुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. यही वजह है कि नए कानून बिहार मद्य निषेध और उत्पाद विधेयक 2016 को तत्काल प्रभाव से गांधी जयंती के पावन अवसर पर इसे लागू कर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून को विधानमंडल ने 4 अगस्त को पारित किया और 7 सितंबर को राज्यपाल का अनुमोदन भी इस कानून को मिला. 14 सितंबर को कैबिनेट ने यह फैसला लिया कि 2 अक्टूबर को इस कानून को लागू कर दिया जाएगा, इसलिए इस नए कानून पर हाई कोर्ट के फैसले का प्रभाव नहीं है. यह बिल्कुल नया कानून है. उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले 6 महीने से शराबबंदी है, ऐसे में इसका प्रभाव भी दिखने लगा है. लोग आरोप लगाते है कि सरकार को 5 हजार करोड के राजस्व की हानि हो रही है, लेकिन जनता का 10 हजार करोड़ रुपये शराबबंदी से बच रहा है. गांव और शहरों में शराबबंदी का असर दिखने लगा है, लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कानून के जरिए शराबबंदी को लागू नहीं किया जा सकता है, इसलिए हम इसे जन चेतना के जरिए सामाजिक परिवर्तन लाना चाहते हैं. विभिन्न स्कूलों के 1 करोड़ 19 लाख लोगों ने हस्ताक्षर कर संकल्प लिया है कि वो शराब नही पिएंगे. 9 लाख जगहों पर नारे लिखे गए. इसी जन चेतना को ध्यान में रखकर अब गांधी जयंती के अवसर पर इसे लागू किया गया है. यह वर्ष गांधीजी के चंपारण यात्रा का 100वां वर्ष भी है. यह हम लोगों की तरफ से गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि है.

'विपक्ष की सलाह पर भी विचार'
नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार मे पहले 1915, 1938 के शराबबंदी के एक्ट को संशोधित कर बनाए गए कानून के जरिए 5 अप्रैल से शराबबंदी लागू की गई थी, लेकिन यह एक्ट बिल्कुल नया है. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला अंतिम नहीं होता है. सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी, ताकि उस एक्ट के जरिए लिए गए फैसले को सरकार लागू करवा सके. उन्होंने चुनौती दी कि अगर विपक्ष को लगता है कि बिना सख्त कानून बनाए शराबबंदी की जा सकती है तो वो कोई ठोस सुझाव दे. सरकार इस पर विचार करेगी. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि हर कानून में संशोधन होता है, इसमें भी जरूरत पड़ने पर किया जाएगा.

नीतीश कुमार ने गोपालगंज में हुए जहरीली शराब पर चर्चा करते हुए कहा कि उस घटना में मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा दिया गया, लेकिन वो सरकार नहीं दे रही है, बल्कि उनसे वसूला जाएगा जिनकी वजह से यह घटना हुई है.

शराबबंदी को लेकर पूर्ण प्रतिबद्ध: सीएम
शुक्रवार को पटना हाई कोर्ट द्वारा बिहार सरकार के शराबबंदी कानून को रद्द किया था. कोर्ट ने पांच अप्रैल को सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया था. इसके बाद से ही राज्य में नए कानून को लागू करने की सुगबुगाहट तेज हो गई थी. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले से ही नए शराबबंदी कानून को 2 अक्टूबर से लागू करने की घोषणा कर चुके थे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लेकर अपने आपको पूरी तरह प्रतिबद्ध बताते हुए यह कदम उठाया है. बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 को पिछले मानसून सत्र में ही विधानमंडल के दोनों सदनों से मंजूरी मिली थी, उसके बाद राज्यपाल ने भी इस कानून पर अपनी सहमति जता चुके हैं. बिहार मद्य निषेद्य और उत्पाद अधिनियम 2016 तत्काल प्रभाव से बिहार में लागू हो गया है.

सजा के साथ जुर्माना भी
बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 में शराबबंदी को लेकर कड़े कानून बनाए गए हैं. नए कानून में यह प्रावधान है कि अगर किसी घर में शराब पीते हुए व्यक्ति के पकड़े जाने और शराब पीने की अनुमति दिए जाने की स्थिति में पकड़े जाने पर कम से कम पांच साल और अधिक से अधिक सात साल तक की सजा का प्रावधान है. ऐसी स्थिति में कम से कम एक लाख रुपये और अधिक से अधिक दस लाख रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है.

कड़ी सजा का प्रावधान
नए नियम में यह प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति शराब की तस्करी करने में महिला या 18 साल से कम उम्र के बच्चों का इस्तेमाल करता है तो उसे कम से दस साल और अधिक से अधिक आजीवन कारावास की सजा हो सकती है. इसमें भी आर्थिक तौर पर कम से कम एक लाख और अधिक से अधिक दस लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. अगर किसी के घर से शराब की बोतल की बरामदगी होती है तो वैसी स्थिति में यह जानकारी देनी होगी कि घर में शराब कैसे लाया? जानकारी नहीं देने पर घर के मालिक को कम से कम आठ साल तक की सजा का प्रावधान नए शराबबंदी कानून में है. अगर किसी गांव में शराब पर प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है तो वैसी स्थिति में उस जिले के जिलाधिकारी को यह शक्ति इस नए कानून में दी गई है की वो उस गांव पर सामूहिक जुर्माना लगा सकता है. इस तरह के और कई कठोर कानून बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 में है जिसे लागू कर दिया गया है.

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