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जीतनराम मांझी ने बुलाई केवल दलित-आदिवासी अधिकारियों की बैठक

विवादास्पद बयान देकर चर्चा में रहने वाले बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने इस बार एक ऐसा कदम उठाया है, जिस पर सियासत गरमाना तय है. पहली बार ऐसा हुआ, जब मुख्यमंत्री ने सिर्फ दलित और आदिवासी अधिकारियों की बैठक बुलाई. बैठक में दलितों और आदिवासियों के लिए किए जाने वाले कामों की समीक्षा की गई और दलित एजेंडे को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई.

विवादास्पद बयान देकर अक्सर चर्चा में रहने वाले बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने इस बार एक ऐसा कदम उठाया है, जिस पर सियासत गरमाना तय है. पहली बार ऐसा हुआ, जब मुख्यमंत्री ने सिर्फ दलित और आदिवासी अधिकारियों की बैठक बुलाई. बैठक में दलितों और आदिवासियों के लिए किए जाने वाले कामों की समीक्षा की गई और दलित एजेंडे को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई. मांझी बोले- गरीबों के विकास की बात करते हैं PM मोदी

सचिवालय में हुई यह बैठक अपने आप में अनूठी थी, जिसमें नीचे से लेकर ऊपर के स्तर तक सिर्फ दलित-आदिवासी अधिकारी ही शामिल थे. करीब 3 घंटे तक चली इस बैठक में दलितों के लिए प्रदेश में चल रहे कामों की समीक्षा की गई. उनके लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में तेजी लाने और दलितों के उत्पीड़न के दर्ज हुए मामलों को भी तेजी से निबटाने पर चर्चा हुई. मीटिंग से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे गुप्त बैठक करार दिया.

जीतनराम मांझी ने अपने कार्यकाल की समयसीमा देखते हुए दलित वोटबैंक की कवायद तेज कर दी है. पहले से ही 20 से 23 प्रतिशत दलित वोट की बात कर रहे मांझी ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है. माना जा रहा है कि मांझी हर हाल में खुद को बिहार का दलित नेता बनाने की तैयारी में जुटे हैं. मुख्यमंत्री की कुर्सी छ‍िनने के खतरे के बाद उन्होंने इस एजेंडे को रफ्तार दे दी है.

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