बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सीएए का विरोध करने वालों पर कड़ा प्रहार किया है. मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि जिनकी राजनीति किसी समुदाय को डराने और बांटने पर टिकी है, वो रस्सी को सांप बताते रहें. पूरे देश में 10 जनवरी 2020 से नागरिकता संशोधन कानून लागू हो चुका है. नागरिकता और जनगणना के मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भ्रम दूर कर दिए हैं, लेकिन जिनको राजनीति करनी है वे करते रहें. एनडीए इन दोनों मुद्दों पर एकजुट है.
सुशील मोदी का यह ट्वीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधानसभा में दिए गए बयान के ठीक एक दिन बाद आया है, बयान में नीतीश कुमार ने सीएए जैसे मुद्दे पर सदन में चर्चा करने की बात कही थी, साथ ही ये भी कहा था कि एनपीआर 2010 से ही लागू है लेकिन उसमें कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं. उनका अध्ययन करने के बाद इस पर कुछ कहेंगे, जबकि नीतीश ने एनआरसी को साफ नकार दिया था. नीतीश कुमार जब विधानसभा में अपना बयान दे रहे थे तो बगल में सुशील मोदी भी बैठे हुए थे लेकिन उपमुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में साफ लिखा है कि नागरिकता और जनगणना के मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भ्रम दूर कर दिए.
मोदी ने अपने ट्वीट में आगे लिखा है कि जो कानून पड़ोसी देशों से आए पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए बना है, उसे देश के किसी व्यक्ति, समुदाय या धर्म के खिलाफ साबित करना 2020 के दशक का सबसे बड़ा झूठ है. उन्होंने सवाल किया कि इस झूठ के लिए महागठबंधन और वामदलों ने पिछले महीने दो बार बंद कराकर सरकारी संपत्ति को जो नुकसान पहुंचाया है, वो क्या असहमति प्रकट करने का लोकतांत्रित तरीका था.
मोदी ने तेजस्वी यादव को आरजेडी का युवराज बताते हुए ट्वीट में लिखा है कि वो संविधान बचाओ यात्रा की नौटंकी करते हैं, जबकि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए "धोखेबाज " जैसे घटिया शब्द का प्रयोग करते हैं. वो बताएं कि जिस मुख्यमंत्री के समय चारा घोटाला, अलकतरा घोटाला, बीएड डिग्री घोटाला हुआ, उसके बारे में कौन से शब्द का उपयोग करेंगे? क्या घोटाले और भ्रष्टाचार से बिहार को खोखला बनाना आरजेडी की विचारधारा का हिस्सा है?