Human heat tolerance: तेज गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण लोगों का मुश्किल हो गया है. गर्मी के कारण अक्सर शरीर में पानी की कमी होने लगती है जिसके कारण अक्सर थकान के साथ-साथ कई समस्याएं होने लगती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, जब सूरज आग उगलता है तो हमारे शरीर के भीतर का सिस्टम उसे कंट्रोल करने की कोशिश करता है लेकिन कई बार शरीर को भी गर्मी सहन करना मुश्किल हो जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान का शरीर अधिकतम कितना तापमान बर्दाश्त कर सकता है? वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तापमान सिर्फ थर्मामीटर पर नहीं बल्कि ह्यूमिडिटी पर भी निर्भर करता है. तो आइए जानते हैं कि इंसानी शरीर कितना तापमान झेल सकता है?
MIT टेक्नोलॉजी रिव्यू के मुताबिक, इंसानी शरीर का सामान्य तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस (98.6°F) होता है. जब बाहर का तापमान बढ़ता है तो पसीना आता है ताकि शरीर ठंडा रह सके. लेकिन रिसर्च बताती हैं कि जब गर्मी के साथ उमस बढ़ती है तो पसीना सूखना बंद हो जाता है.
वैज्ञानिकों ने एक वेट-बल्ब टेम्परेचर (Wet-bulb temperature) की लिमिट बताई है. रिसर्च के अनुसार, 35 डिग्री सेल्सियस का वेट-बल्ब टेम्परेचर (जो लगभग 46 डिग्री सेल्सियस की सूखी गर्मी और हाई ह्यूमिडिटी के बराबर है) इंसानी सहनशक्ति की आखिरी सीमा है. इसके बाद शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता.
साइंटिफइक अमेरिकन की रिपोर्ट के मुताबिक, जब गर्मी हद से ज्यादा बढ़ जाती है तो शरीर का इंटरनल टेम्परेचर 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुंच सकता है जिसे हीट स्ट्रोक कहते हैं.
अत्यधिक हीट की स्थिति में हमारा दिल शरीर को ठंडा करने के लिए स्किन की तरफ खून को तेजी से पंप करता है. इससे ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है और किडनी, लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. अगर समय रहते शरीर को ठंडा न किया जाए तो अंग फेल होने का खतरा बढ़ जाता है.
पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि सिर्फ लू चलना ही खतरनाक नहीं है बल्कि ह्यूमिड हीट ज्यादा जानलेवा होती है. सूखी गर्मी में पसीना वाष्पित होकर शरीर को ठंडक देता है लेकिन उमस भरे माहौल में ऐसा नहीं हो पाता. युवा और स्वस्थ लोगों के लिए भी उमस वाली गर्मी में 31 डिग्री सेल्सियस का वेट-बल्ब टेम्परेचर भी खतरनाक साबित हो सकता है. इससे यह साफ है कि ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में हीट टॉलरेंस की सीमाएं तेजी से कम हो रही हैं.