आजकल सोशल मीडिया पर सेहत से जुड़ी जानकारी बहुत आसानी से मिल जाती है. लोग यहां डाइट, एक्सरसाइज और बीमारियों के बारे में पढ़ते-देखते हैं और कई बार उसी आधार पर अपनी सेहत को लेकर फैसला भी कर लेते हैं. लेकिन कई बार सोशल मीडिया पर सही जानकारी और गलत दावों के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है. फैटी लिवर बीमारी इसका एक बड़ा उदाहरण है जिसे लेकर इंटरनेट पर कई तरह के मिथक फैल रहे हैं.
सोशल मीडिया पर फैटी लिवर से जुड़े मिथक
फ्रंटियर्स रिसर्च फाउंडेशन (Frontiers Research Foundation) में छपी एक स्टडी के अनुसार, सोशल मीडिया पर फैटी लिवर से जुड़े ज्यादातर वीडियो सही जानकारी नहीं देते. कुछ वीडियो हेल्थ एक्सपर्ट्स के होते हैं जो भरोसेमंद होते हैं लेकिन अधिकांश कंटेंट अधूरा होता है. इसलिए सोशल मीडिया पर देखी गई किसी भी जानकारी के आधार पर खुद से बीमारी का अंदाजा लगाना ठीक नहीं है. ऐसे में आज हम फैटी लिवर से जुड़े कुछ आम मिथकों और उनके पीछे की सच्चाई के बारे में जानेंगे.
मिथक 1: फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों में होता है
सच्चाई: यह सही है कि मोटापा फैटी लिवर का बड़ा कारण है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दुबले-पतले लोग इससे बचे हुए हैं. जर्नल ऑफ हेपेटोलॉजी (Journal of Hepatology) में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, फैटी लिवर की समस्या वाले लगभग 25% लोग ऐसे थे जो न तो मोटे थे और न ही ज्यादा वजन वाले. यानी दुबले लोगों को भी फैटी लिवर हो सकता है.
मिथक 2: सप्लीमेंट या डिटॉक्स ड्रिंक फैटी लिवर को ठीक कर देते हैं
सच्चाई: कई लोग मानते हैं कि कुछ खास सप्लीमेंट या डिटॉक्स ड्रिंक पीने से फैटी लिवर ठीक हो जाता है. लेकिन मायो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, सप्लीमेंट लिवर की सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं लेकिन वे प्रॉपर ट्रीटमेंट की जगह नहीं ले सकते. सही डाइट, एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल के बिना सिर्फ सप्लीमेंट पर भरोसा करना गलत है. वहीं जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन (Johns Hopkins Medicine) का कहना है कि ज्यादातर लिवर डिटॉक्स प्रोडक्ट्स के पास कोई ठोस साइंटिफिक प्रूफ नहीं होते और कई बार ये नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.
मिथक 3: फैटी लिवर सिर्फ उम्रदराज लोगों को होता है
सच्चाई: अक्सर यह माना जाता है कि फैटी लिवर केवल बड़ी उम्र के लोगों की बीमारी है लेकिन ऐसा नहीं है. PLOS One जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, लगभग 7.6% बच्चे और किशोर (1 से 19 साल की उम्र के) भी फैटी लिवर से प्रभावित पाए गए. यानी यह समस्या बच्चों में भी हो सकती है.
इसलिए फैटी लिवर को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी में न रहें. सही जानकारी, समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह ही इस बीमारी से बचाव और कंट्रोल का सही तरीका है.