सिरदर्द, बदन दर्द या हल्का बुखार होने पर अक्सर लोग केमिस्ट के पास जाकर खुद दवा खरीद लेते हैं या फिर यदि डॉक्टर ने महीनों पहले यदि किसी बीमारी की दवा लिखी थी तो उसे वे अपने पास रख लेते हैं और भविष्य में कभी उससे संबंधित बीमारी हो तो वही खा लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह सेल्फ-मेडिकेशन की आदत लिवर को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है. मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, पेरासिटामोल और अन्य दर्द निवारक दवाएं लिवर फेलियर का सबसे बड़ा कारण बनकर उभर रही हैं.
ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल्स (हैदराबाद) की लीड हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. काव्या हारिका देंदुकुरी बताती हैं कि उनके पास हर हफ्ते ऐसे मरीज आते हैं जो एक्यूट हेपेटाइटिस या ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर फेलियर का शिकार होते हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इसका कारण शराब नहीं, बल्कि बिना पर्ची के ली गई पेनकिलर्स और एंटीबायोटिक्स होती हैं
डॉ. काव्या हारिका बताती हैं कि मरीज अक्सर पड़ोसियों की सलाह पर एंटीबायोटिक्स या ऑनलाइन ऑर्डर किए गए उन सप्लीमेंट्स का सेवन शुरू कर देते हैं जो लिवर को डिटॉक्स करने का दावा करते हैं. जब लोग एक साथ कई ऐसी दवाएं लेते हैं जिनमें अनजाने में एक ही साल्ट (जैसे एसिटामिनोफेन) मौजूद होता है तो लिवर उस टॉक्सिक लोड को सहन नहीं कर पाता.
ब्रिटिश लिवर ट्रस्ट के अनुसार, पेरासिटामोल की ओवरडोज ब्रिटेन में एक्यूट लिवर फेलियर का सबसे बड़ा कारण है.
भारत में भी लोग अक्सर एक साथ कई ऐसी दवाएं खा लेते हैं जिनमें पेरासिटामोल छिपा होता है जैसे कि सर्दी-जुकाम की दवा और पेनकिलर. इससे शरीर में इस सॉल्ट की मात्रा अचानक बढ़ जाती है और लिवर इसे फिल्टर नहीं कर पाता. ऐसे में दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल लिवर की कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है.
मायो क्लिनिक की रिपोर्ट बताती है कि इन दवाओं के लंबे समय तक सेवन से टॉक्सिक हेपेटाइटिस (Toxic Hepatitis) हो सकता है. यह लिवर में सूजन पैदा करता है और धीरे-धीरे लिवर की कार्यक्षमता को खत्म कर देता है. अगर आप शराब का सेवन करते हैं और साथ में पेनकिलर लेते हैं, तो लिवर डैमेज होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए सिर्फ पेरासिटामोल ही नहीं, बल्कि इबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी दवाएं भी लिवर और किडनी के लिए खतरनाक हो सकती हैं.
Johns Hopkins Medicine के अनुसार, लंबे समय तक पेनकिलर्स का सेवन न केवल लिवर बल्कि किडनी को भी 'एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी' जैसी लाइलाज बीमारी दे सकता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि कभी भी बिना डॉक्टर के परामर्श के दवा न लें.
दवा लेने से पहले उसके लेबल को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप दैनिक सीमा (4000 मिलीग्राम से कम) को पार नहीं कर रहे हैं. यदि आपको थकान, पीलिया या पेट में दर्द जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.