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फैक्ट चेक: मोहन यादव ने यूजीसी के खिलाफ सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग होने की बात नहीं कही है, ये है पूरा मामला

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग की बात कही है. आजतक की फैक्ट चेक टीम ने इस वायरल दावे की पड़ताल की है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कहा है कि यूजीसी के खिलाफ सवर्णों के आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग थी.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
मोहन यादव के बयान वाला ये न्यूज ग्राफिक 2018 का है. उन्होंने यूजीसी मामले को लेकर ऐसा कुछ नहीं कहा है.

यूजीसी यानि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के जिन नियमों को लेकर देशभर में बवाल मचा, उन पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. इन नियमों के खिलाफ देशभर में सवर्ण समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. कोर्ट से स्टे जरूर मिला लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियमों की वापसी तक विरोध जारी रहेगा.

इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा जा रहा है कि बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूजीसी के खिलाफ सवर्णों के आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग होने की बात कही है.

वायरल पोस्ट में एक न्यूज चैनल के ‘ब्रेकिंग न्यूज ग्राफिक’ की तस्वीर है. इसमें लिखा है- “सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग: मोहन यादव”. अब सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे यूजीसी प्रदर्शनकारियों पर मोहन यादव की हालिया टिप्पणी बताकर उनकी आलोचना कर रहे हैं.

मिसाल के तौर पर फेसबुक पर एक व्यक्ति ने लिखा, “चपरासी बनने की औकात नहीं है कृपा से मुख्यमंत्री बने हैं. पाकिस्तान से आ रही है फंडिंग. और कुछ भी? #UGC #UGCRollBack” इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि मोहन यादव ने यूजीसी प्रदर्शन को लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है. वायरल हो रहा न्यूज ग्राफिक 2018 का है.

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कैसे पता की सच्चाई?

वायरल हो रहे न्यूज ग्राफिक में 20 सितंबर की तारीख लिखी हुई है जबकि यूजीसी का मामला तो इस साल की जनवरी का है. रिवर्स सर्च करने पर हमें ये ग्राफिक सितंबर 2018 के कई पोस्ट्स में मिला. यानि इतनी बात तो यहीं साफ हो जाती है ये काफी पुराना है और इसका हालिया यूजीसी विवाद से कोई लेना-देना नहीं है.

सितंबर 2018 में कई लोगों ने अलग-अलग चैनल्स की क्लिप्स शेयर की थी जिनमें मोहन यादव के इस बयान का जिक्र था. अभी वायरल हो रही तस्वीर भी इसी क्लिप का स्क्रीनशॉट है.

इस जानकारी के साथ सर्च करने पर हमें इस मामले पर उस वक्त छपी न्यूज रिपोर्ट्स मिलीं. दरअसल सितंबर 2018 में सवर्ण समाज के लोग एससी/एसटी ऐक्ट के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर रहे थे. करणी सेना के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में बड़ी रैली निकाली गई थी.

दैनिक भास्कर और जी एमपी छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट के मुताबिक मोहन यादव ने इस पर कहा कि सवर्ण आंदोलन के लिए विदेशी फंडिंग हो रही है. सिमी और इस्लामिक कट्टरपंथी हिंदू, समाज को बांटने की साजिश रच रहे हैं. हमें आपस में लड़ाकर फूट डालने की कोशिश की जा रही है. मोहन यादव उस वक्त उज्जैन से बीजेपी के विधायक थे.

हालांकि विवाद बढ़ा तो मोहन यादव ने सफाई देते हुए इस बयान का खंडन किया. उन्होंने कहा, “आज कुछ चैनल पर सवर्ण और करणी सेना को लेकर मेरे हवाले से झूठी जानकारी दी जिसका मैं खंडन करता हूं. मैंने कभी भी करणी सेना व सवर्ण आंदोलन पर विदेशी फंडिंग की बात नहीं की. परस्पर समाजों को लड़ाने की बात मैं कभी नहीं करता हूं.”

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रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके इस बयान को लेकर करणी सेना के लोग उनके दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए थे. इसके बाद मोहन यादव ने करणी सेना से कहा था कि उन्होंने सवर्ण समाज या करणी सेना का नाम नहीं लिया और उनका बयान काट-छांट के दिखाया जा रहा है.

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