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फैक्ट चेक: जनसंख्या कानून की चर्चा के बीच वायरल दिव्यांग और उसके परिवार की ये तस्वीर भारत की नहीं है

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल होने लगी है जिसमें एक आदमी व्हीलचेयर पर बैठा नजर आ रहा है जिसे कुछ बच्चे और एक औरत घेर कर खड़े हैं. तस्वीर को इस तरह से दर्शाया जा रहा है कि ये भारत की है और इसमें दिख रहे बच्चे व्हीलचेयर पर बैठे आदमी के हैं.

सोशल मीडिया में वायरल तस्वीर की क्या है सच्चाई सोशल मीडिया में वायरल तस्वीर की क्या है सच्चाई

देश में इस समय जनसंख्या नियंत्रण कानून पर चर्चा जोरों पर है. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जनसंख्या कानून का ड्राफ्ट भी पेश कर दिया है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल होने लगी है जिसमें एक आदमी व्हीलचेयर पर बैठा नजर आ रहा है जिसे कुछ बच्चे और एक औरत घेर कर खड़े हैं. तस्वीर को इस तरह से दर्शाया जा रहा है कि ये भारत की है और इसमें दिख रहे बच्चे व्हीलचेयर पर बैठे आदमी के हैं.

एक ट्विटर पोस्ट में इस तस्वीर के साथ लिखा गया है कि पीएम मोदी को दो बच्चों के बाद नसबंदी अनिवार्य कर देनी चाहिए जिससे आबादी न बढ़े और सरकार पर मुफ्त की सुविधाएं बांटने का बोझ कम हो. तस्वीर को अलग-अलग कैप्शन के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. ट्वीट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.

 

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि ये तस्वीर भारत की नहीं बल्कि बांग्लादेश की है. असल में, ये तस्वीर एक रोहिंग्या मुस्लिम परिवार की है जो बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में स्थित एक शरणार्थी कैंप में खींची गई थी.

तस्वीर को बिंग सर्च इंजन पर खोजने पर हमें अन्तर्राष्ट्रीय मैगजीन 'DODHO' की एक खबर मिली, जिसमें ये तस्वीर मौजूद है. ये खबर सैन्य कार्रवाई के चलते म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में शरण लिए रोहिंग्या मुस्लिमों पर थी. खबर के अनुसार, तस्वीर में व्हीलचेयर पर दिख रहे आदमी का नाम मोहम्मद आलमगीर है जो पोलियो होने की वजह से अपाहिज है. म्यांमार में हुई हिंसा के कारण मोहम्मद को अपने परिवार के साथ भागना पड़ा और कॉक्स बाजार के एक शरणार्थी कैंप में शरण लेनी पड़ी.

"इंटरनेशनल फोटोग्राफी मैगजीन" नाम की एक वेबसाइट के लेख में भी इस तस्वीर को इस्तेमाल किया गया है और कॉक्स बाजार के कुटुपालोंग शरणार्थी शिविर का बताया गया है. इस शिविर को दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर कहा जाता है और इसमें ज्यादातर शरणार्थी रोहिंग्या ही हैं.

ये तस्वीर प्रोबल राशिद नाम के एक बांग्लादेशी फोटोग्राफर ने 2017 में खींची थी. यहां इस बात की पुष्टि हो जाती है कि जिस तस्वीर को भारत और जनसंख्या कानून से जोड़ते हुए शेयर किया जा रहा है वो बांग्लादेश की है.

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

व्हीलचेयर पर बैठे आदमी और उसके बच्चों की ये तस्वीर भारत की है जो कि देश में बढ़ती आबादी को दिखाती है.

निष्कर्ष

तस्वीर भारत की नहीं बल्कि बांग्लादेश की है. असल में ये तस्वीर एक रोहिंग्या मुस्लिम परिवार की है जो बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में स्थित एक शरणार्थी कैंप में खींची गई थी.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
सोशल मीडिया यूजर्स
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