हाल ही में महाराष्ट्र के पुणे जिले के भीमा कोरेगांव गांव में दलित समाज के लोगों ने शौर्य दिवस मनाया. एक जनवरी को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में हर साल की तरह इस बार भी भारी संख्या में लोग इकट्ठे हुए.
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसे कुछ लोग भीमा कोरेगांव में इकट्टा हुई भीड़ के वीडियो के तौर पर पेश कर रहे हैं और कुछ लोग ऐसा समझ भी रहे हैं.
इस वीडियो की शुरुआत में एक नीले-सफेद रंग का झंडा दिखाई देता है. इसके साथ सड़कों पर जुटी लोगों की भारी भीड़ दिखाई देती है. वीडियो में एक गाना भी बज रहा है जिसमें कोरेगांव की शान में बातें कही जा रही हैं. वीडियो में काली पट्टी पर सफेद रंग से लिखा है, ' ताजमहल अगर प्यार की निशानी है तो भीमा कोरेगांव तुम्हारे बाप की निशानी है. 500 vs 28000.'
एक फेसबुक यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, 'जय भीम साथियो.'
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इस वीडियो को भीमा कोरेगांव से जुड़ा हुआ समझकर इस पोस्ट पर एक फेसबुक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, 'जय भीम. भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस जिंदाबाद. जय संविधान, जय भारत.'
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इंडिया टुडे फैक्ट चेक ने पाया कि वायरल वीडियो भीमा कोरेगांव का नहीं बल्कि अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स का है. इस वीडियो में दिख रहे लोग 2022 में संपन्न हुए फीफा वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के चैंपियन बनने की खुशी को सेलीब्रेट करने के लिए इकट्ठे हुए थे.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वायरल वीडियो की शुरुआत में ही एक झंडा लहराता दिखाई दे रहा है. गौर से देखने पर समझ में आ जाता है कि ये झंडा अर्जेंटीना का है. हमने कीवर्ड सर्च के जरिए जब इस वीडियो के कीफ्रेम्स को खोजा तो हमें इंस्टाग्राम पर इसका एक बड़ा वर्जन मिला. इसे 19 दिसंबर, 2022 को अपलोड किया गया था. इसके साथ दी गई जानकारी के मुताबिक यह ब्यूनस आयर्स में अर्जेंटीना की वर्ल्ड कप में जीत के बाद फैंस के सेलीब्रेशन का वीडियो है.
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इस सेलीब्रेशन के वीडियो को यूट्यूब पर भी देखा जा सकता है.
18 दिसंबर, 2022 को अर्जेंटीना ने कतर में आयोजित हुए फीफा वर्ल्ड कप में फ्रांस को पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से मात देकर तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन का खिताब हासिल किया था.
जाहिर है, अर्जेंटीना में जुटी भीड़ को भीमा कोरेगांव में जुटी भीड़ बताते हुए कुछ इस तरह पेश किया जा रहा है जिससे लोगों में भ्रम फैल रहा है.
कब और क्यों हुआ था भीमा कोरेगांव युद्ध?
साल 1818 में ये युद्ध मराठा राज्य और अंग्रेजों के बीच हुआ था. उस वक्त ‘अछूत’ मानी जाने वाली ‘महार’ जाति के सैनिकों ने अंग्रेजों की ओर से ‘ब्राह्मण’ पेशवा की सेना के खिलाफ युद्ध लड़ा था. इसमें ब्रिटिश सेना ने संख्या में कहीं ज्यादा बड़ी मराठा आर्मी को कड़ी टक्कर दी थी. इस युद्ध की याद में अंग्रेजों ने भीमा कोरेगांव में एक विजय स्तंभ भी बनवाया था। इसे दलित वर्ग गर्व के प्रतीक के तौर पर देखता है.
इस युद्ध की बरसी मनाने के लिए हर साल एक जनवरी को दलित वर्ग के लोग भीमा कोरेगांव में इकट्ठे होते हैं.
साल 2018 में इस युद्ध के 200 साल पूरे होने के मौके पर हुए आयोजन के दौरान भीमा कोरेगांव में हिंसा भी हुई थी. इस हिंसा के दौरान एक व्यक्ति की मृत्यु भी हो गई थी. इसके बाद कई लोगों को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.