सियासी उठापटक और हिंसा के बाद अब बांग्लादेश के लोगों पर बाढ़ की आफत आन पड़ी है. इस बाढ़ से बांग्लादेश में लाखों लोग प्रभावित और 15 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है जिसमें पानी में कंधे तक डूब चुके कुछ मुस्लिमों को नमाज अदा करते हुए देखा जा सकता है.
तस्वीर को बांग्लादेश का बताकर अप्रत्यक्ष रूप से इसे वहां हाल ही में हिंदुओं पर हुए हमलों से जोड़ा जा रहा है. ये कहने की कोशिश की जा रही है कि शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद हुई हिंसा में मुस्लिमों ने जो हिंदुओं के साथ किया उसका फल बांग्लादेश के लोगों को अब मिल रहा है. ऐसा लिखते हुए लोग फोटो को बांग्लादेश में अभी आई बाढ़ का बता रहे हैं.

वायरल तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा है, “इस समय बांग्लादेश में आई भयानक बाढ़ से हाल बेहाल। कर्म का फल मिलता है पर इतनी जल्दी मिलता है ये पहली बार देख रहा हूं”. इस कैप्शन के साथ ये तस्वीर फेसबुक और एक्स पर सैकड़ों लोग शेयर कर चुके हैं. वायरल पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये तस्वीर बांग्लादेश की तो है लेकिन हाल-फिलहाल की नहीं बल्कि 2021 की है.
कैसे पता चली सच्चाई?
वायरल तस्वीर को रिवर्स सर्च के जरिये खोजने पर हमें ये इंटरनेशनल फोटोग्राफी अवार्ड्स की वेबसाइट पर मिली. यहां फोटो के बारे में पूरी जानकारी दी गई है. इसके मुताबिक, फोटो 8 अक्टूबर 2021 की बांग्लादेश के सतखीरा शहर की है जो सुंदरबन जंगल के पास स्थित है. उस समय ये इलाका बाढ़ से प्रभावित था और ये लोग बाढ़ से बचने के लिए मस्जिद में अल्लाह से दुआ कर रहे थे. लेकिन कुछ दिनों बाद ये मस्जिद भी ढह गई थी. इस फोटो को शरवार हुसैन नाम के बांग्लादेशी फोटोग्राफर ने खींचा था.

हमें शरवार हुसैन की इंस्टाग्राम प्रोफाइल मिली. शरवार ने 29 मार्च 2022 को वायरल फोटो को शेयर करते हुए बताया था कि उनकी इस फोटो ने ‘वर्ल्ड वॉटर डे फोटो प्रतियोगिता’ में दूसरा स्थान प्राप्त किया था.
यहां ये स्पष्ट हो जाता है कि वायरल तस्वीर लगभग तीन साल पुरानी है जिसे बांग्लादेश में अभी आई बाढ़ का बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है.