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फैक्ट चेक: क्या आरओ का पानी पीना सेहत के लिए खतरनाक है? इस वायरल वीडियो के दावे पर यकीन न करें

अगर कोई कहे कि आरओ का पानी पीने से कई तरह की बीमारियां हो रही हैं तो यकीनन आप परेशान हो जाएंगे. लेकिन क्या ये सच है कि आरओ का पानी पीने से बीमारियां हो रही हैं? सोशल मीडिया पर तो ऐसा ही दावा किया जा रहा है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
आरओ के पानी में मिनरल्स नहीं होते, इसलिए उसमें बिजली का तार डालने पर बल्ब नहीं जलता. इस वजह से आरओ का पानी पीने के बजाय नल का पानी पीना चाहिए.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
आरओ के पानी में मिनरल्स नहीं होने की बात बेबुनियाद है. आरओ का पानी पीने से कोई खतरा नहीं है, बशर्ते डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार उसका टीडीएस लेवल 300 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम हो.

साफ पानी के लिए आपके घर में भी आरओ लगा होगा. लेकिन अगर कोई कहे कि आरओ का पानी पीने से कई तरह की बीमारियां हो रही हैं तो यकीनन आप परेशान हो जाएंगे. लेकिन क्या ये सच है कि आरओ का पानी पीने से बीमारियां हो रही हैं? सोशल मीडिया पर तो ऐसा ही दावा किया जा रहा है.

​एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें देखा जा सकता है कि एक शख्स के सामने टेबल पर चार गिलास रखे हैं. वह बताता है कि पहले गिलास में आरओ (RO) का पानी है, दूसरे में नल का पानी है, तीसरे में दूध है और चौथे में दही है. वह व्यक्ति बारी-बारी सभी गिलासों में बिजली का तार डालता है. इनमें से एक गिलास में तार डालने पर बल्ब नहीं जलता और बाकी तीन में तार डालने से बल्ब जल जाता है.

उसका दावा है कि जिस गिलास में बिजली का तार डालने पर बल्ब नहीं जला, उसमें आरओ का पानी है. दावे के अनुसार, आरओ के पानी में कोई मिनरल या दूसरे तत्व नहीं होने की वजह से बल्ब नहीं जला. इसलिए आजकल लोगों को बहुत सारी बीमारियां हो रही हैं. इससे पहले जब हम घड़े का पानी पीते थे तो दिक्क्त नहीं होती थी. वह व्यक्ति लोगों को आरओ का पानी पीने के बजाय नल का पानी पीने की सलाह देता है.

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इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. बिल्कुल शुद्ध पानी में करंट सप्लाई के लिए जरूरी तत्व नहीं होते हैं, इसलिए उसमें बिजली का प्रवाह नहीं हो सकता. RO का पानी स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल सुरक्षित है बशर्ते इसका TDS लेवल 300 मिलीग्राम प्रतिलीटर से कम हो. इसके अलावा, आधुनिक RO सिस्टम की एडवांस टेक्नोलॉजी पानी में शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स को भी ऐड कर देती है.

स्टोरी लिखे जाने तक फेसबुक पर वायरल  इस वीडियो को 6000 से ज्यादा लोग देख चुके हैं. फेसबुक पर ये वीडियो कई लोग शेयर कर रहे  हैं. पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है. इसके अलावा एक ट्विटर यूजर ने भी इस वीडियो को शेयर किया है. इसका आर्काइव वर्जन यहां  देखा जा सकता है.

क्या है सच्चाई
वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे की सच्चाई जानने ​के लिए हमने दिल्ली विश्वविद्यालय के एआरएसडी कॉलेज में फिजिक्स विभाग के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ अशोक से बात की. उन्होंने बताया, "RO का पानी स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल सुरक्षित है, बशर्ते इसका TDS लेवल 300 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम हो, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से तय किया गया मानक है.

बिल्कुल शुद्ध पानी में करंट सप्लाई के लिए आवश्यक Ions (कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम वगैरह) नहीं होते हैं, इसलिए उसमें बिजली का प्रवाह नहीं हो सकता और बल्ब नहीं जलता. लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि उसमें उपयोगी तत्व नही हैं. जिस पानी या द्रव में ये तत्व मौजूद हैं, उनमें बल्ब तो जलेगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वे शुद्ध हैं."

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डॉ अशोक ने बताया, "आधुनिक RO सिस्टम में एडवांस रिकवरी टेक्नोलॉजी (ART) और मिनरलाइजर टेक्नोलॉजी होती है जो हमारे शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स को उस पानी में ऐड भी कर देती है. ये RO सिर्फ हार्ड मिनरल्स को एक निश्चित मात्रा में पानी से अलग करते हैं. शरीर के लिए दूध-दही के साथ-साथ साफ और शुद्ध पानी भी उतना ही जरूरी है."

इस वायरल वीडियो के दावे के अनुसार, RO के पानी में मिनरल्स नहीं हैं और इस वजह से कई बीमारियां भी होती हैं. इस बारे में हमने फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विज्ञान विभाग के वरिष्ठ कंसलटेंट डॉक्टर अमित मिगलानी से बात की.

उन्होंने बताया, "RO में जब पानी प्रोसेस होता है तो सबसे पहले ये मशीन पानी के हार्डनेस को कम कर देती है. इस वजह से थोड़ा सा कैल्सियम, मैग्नीशियम और इसके अलावा कुछ कीटाणुओं की भी मात्रा कम हो जाती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इस पानी को पीने से बीमारियां हो जाएंगी. अब RO की नई टेक्नोलॉजी में मिनरल्स को ऐड किया जाता है, जिससे पानी शुद्ध मिलता है. वायरल वीडियो में किया जा रहा दावा बिल्कुल निराधार है."

आरओ के पानी में क्यों नहीं जल रहा बल्ब?  
वीडियो में तीन तरह के द्रव में बल्ब जलने की वजह क्या है, इस बारे में प्रोफेसर अशोक ने बताया, "बिजली प्रवाह के लिए किसी चालक माध्यम का होना आवश्यक है. बिजली के कारण बल्ब तभी जल पाएगा जब उसका इलेक्ट्रॉनिक सर्किट पूरा होगा. ये इलेक्ट्रॉनिक सर्किट किसी भी चालक पदार्थ या चालक द्रव से पूरा हो सकता है. किसी भी द्रव में मौजूद आयनों की संख्या जितनी अधिक होगी, उस द्रव की विद्युत चालकता उतनी ही अधिक होगी. इसीलिए नल के पानी, दूध और दही में बल्ब जल रहा है. द्रव में मौजूद आयन इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को पूरा करते हैं और बल्ब को जलाते हैं.

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शुद्ध पानी (Deionized water) या भाप से बना पानी (distilled water) विद्युत का कुचालक होता है. जब इलेक्ट्रोडस (Positive and negative terminal of battery) को शुद्ध जल में डालते हैं तो बल्ब नहीं जलता, लेकिन अशुद्धियों की थोड़ी सी भी मौजूदगी पानी को अच्छा संवाहक (चालक) बनाती है. इसलिए नल, कुआं, तालाब, नदी, समुद्र, झील वगैरह का पानी बिजली का संचालन करता है क्योंकि उनमें आयन की मौजूदगी के कारण अशुद्धता होती है. दूध या दही की विद्युत चालकता इसके घुलनशील लवण अंश (soluble salt fraction) के कारण होती है.

इन दोनों ही विशेषज्ञों ने कहा कि वायरल वीडियो में जिस तरह से पानी में बिजली का तार डालकर जांच की जा रही है, वह पानी की शुद्धता जांचने का कोई मानक पैमाना है ही नहीं. हमारी पड़ताल से ये बात साफ हो जाती है कि वायरल वीडियो में किया जा रहा दावा बेबुनियाद है.

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सच जानने के लिए उसे हमारे नंबर 73 7000 7000 पर भेजें.
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