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फैक्ट चेक: मनमोहन सरकार में नहीं हुई थी 'सेंट जॉर्ज क्रॉस' वाले नौसेना ध्वज की वापसी, वाजपेयी के समय ही हो गया था फैसला

भारतीय नौसेना का ध्वज इन दिनों चर्चा में है. क्योंकि बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने तीन सितंबर, 2022 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि साल 2004 में सोनिया गांधी के आग्रह पर यूपीए सरकार ने नौसेना के ध्वज में ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को फिर से जोड़ा. बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा.

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भारतीय नौसेना का ध्वज इन दिनों चर्चा में है भारतीय नौसेना का ध्वज इन दिनों चर्चा में है

भारतीय नौसेना का ध्वज इन दिनों चर्चा में है. विवाद इस बात पर है कि क्या साल 2004 में ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने फिर से इस ध्वज में शामिल किया था?   

बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने 3 सितंबर, 2022 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि साल 2004 में सोनिया गांधी के आग्रह पर यूपीए सरकार ने नौसेना के ध्वज में ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को फिर से जोड़ा. ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को 2001 में नौसेना के झंडे से हटा दिया गया था.

बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी ट्विटर पर तस्वीरों का एक कोलाज  शेयर करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा, “गौरतलब है कि औपनिवेशिक राजा के जिस क्रॉस को अटल जी की सरकार ने हटाया था उसे कांग्रेस ने वापस जोड़ दिया. इससे कांग्रेस की गुलाम और औपनिवेशिक मानसिकता पता चलती है.”  

सोशल मीडिया पर भी नये-पुराने झंडों का ये कोलाज वायरल हो रहा है. एक फेसबुक पेज पर इसे शेयर करते हुए लिखा गया, “गौर से देखें, भारतीय नौसेना का ये बदलता ध्वज बहुत कुछ कहता है.”   
 

इस कोलाज में कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों के सामने वाले नौसेना के ध्वज में ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ शामिल है जबकि बीजेपी के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी के सामने वाले नौसेना के ध्वज में ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ शामिल नहीं है.

इंडिया टुडे फैक्ट चेक टीम ने पाया कि साल 2004 में नौसेना के ध्वज में बदलाव करके उसमें लाल धारियों वाले वाले ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को जोड़ने का फैसला मनमोहन सिंह सरकार का नहीं था. ये फैसला अटल बिहारी वाजपेयी की कार्यवाहक सरकार के दौरान लिया गया था. 
 

कैसे पता लगाई सच्चाई?   

कीवर्ड्स सर्च के जरिए हमें ‘रेडिफ डॉट कॉम’ की वेबसाइट पर 24 अप्रैल, 2004 की एक न्यूज रिपोर्ट मिली. इस रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय नौसेना के ध्वज में फिर से ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को शामिल करने का फैसला 25 अप्रैल, 2004 को लागू होना तय हुआ था.  

खोजने पर हमें साल 2004 के अप्रैल महीने के भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन की आर्काइव्ड कॉपी भी मिली.   

18 अप्रैल से 24 अप्रैल, 2004 तक के इस नोटिफिकेशन में पेज 215 पर नौसेना के ध्वज में ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ की वापसी के फैसले की जानकारी है. हालांकि उसे ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ नहीं कहा गया. इसमें बताया गया है कि ये फैसला 25 अप्रैल, 2004 से लागू हुआ.  

इसके पॉइंट नं 5 के पहले हिस्से में लिखा है, “एक सफेद रंग का पोत ध्वज जिसमें पोत ध्वज के केंद्र में एक दूसरे को काटती हुई क्षैतिज लाल पट्टी और ऊर्ध्वाधर लाल पट्टी होगी, कटान पर सुनहरा पीला राजप्रतीक और ध्वज दंड के अगले ऊपरी भाग में राष्ट्रीय ध्वज अध्यारोपित होगा. श्वेत पोत ध्वज विनियम 70 में विहित रीति में प्रदर्शित किया जाएगा.”  


अप्रैल-मई, 2004 में देश में आम चुनाव चल रहे थे. 20 अप्रैल, 2004 से लेकर 10 मई, 2004 तक चार चरणों में मतदान हुआ था. उस वक्त केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में कार्यवाहक सरकार थी. 13 मई को चुनाव के नतीजे आने के बाद मनमोहन सिंह की अगुआई में यूपीए की सरकार ने 22 मई, 2004 को सत्ता संभाली थी.  


इससे पहले नौसेना का ध्वज साल 2001 में बदला गया था और ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को हटाकर उसमें नीले रंग के नेवी क्रेस्ट और राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चिन्ह को जोड़ा गया था. बाईं ओर ऊपर की तरफ भारत का राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया. साल 2004 में इसमें बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी ये जानने के लिए हमने उस दौरान   नौसेना प्रमुख रहे एडमिरल माधवेंद्र सिंह (रिटायर्ड ) से बात की. 

उनके मुताबिक “2001 में बदला गया निशान वाला झंडा जब जहाजों में लगाया गया तो  वो समंदर में ठीक से दिखाई नहीं देता था. उसका फीडबैक अच्छा नहीं था तो हमने फैसला किया के पुराने निशान को वापस लाया जाए. उस वक्त ये आपत्ति थी कि ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को वापस नहीं लाया जाना चाहिए. तो हमने कहा कि इसे सेंट जॉर्ज क्रॉस नहीं कहेंगे इसे हॉरिजोंटल रेड लाइन और वर्टिकल रेड लाइन कहेंगे और इसके बीच में अपना राष्ट्रीय़ प्रतीक लगाएंगे. तो फिर ये ऑफिशियली सेंट जॉर्ज क्रॉस नहीं रहेगा.”  

माधवेंद्र सिंह आगे बताते हैं, “उस वक्त जॉर्ज फर्नांडीज रक्षा मंत्री थे. हमने सरकार को बताया कि हम इसे बदलना चाहते हैं और सरकार ने हमारी बात मान ली.”  

इसी सिलसिले में हमने एक और पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) से बात की. उस वक्त वो उप नौसेना प्रमुख थे. उनका कहना है कि “साल 2001 मे बदले गए नौसेना के ध्वज से समंदर में तैनात जहाजों को असुविधा होने लगी क्योंकि इसे दूर से पहचानने में कठिनाई होती थी. नौसेना में जहाजों के बीच कम्युनिकेशन में ध्वज की अहम भूमिका होती है. लिहाजा इसमें फिर से बदलाव करने का फैसला हुआ.”  

इसके बाद साल 2014 में नौसेना के ध्वज में एक और बदलाव हुआ और अशोक चिन्ह के नीचे ‘सत्यमेव जयते’ भी लिखा गया.  साल 1950 में भारत के गणतंत्र बनने के बाद नौसेना के ध्वज में ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ के साथ लगे ब्रिटिश झंडे ‘यूनियन जैक’ को हटाकर भारतीय तिरंगा जोड़ा गया था. 

2 सितंबर, 2022 को औपनिवेशक राज के प्रतीक ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को हटाकर छत्रपति शिवाजी की नौसेना के ध्वज से प्रेरित निशान को नौसेना के ध्वज में शामिल किया गया. 
 

 (रिपोर्ट- सुमित कुमार दुबे) 

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर

दावा

साल 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार ने भारतीय नौसेना के ध्वज में औपनिवेशिक शासन के प्रतीक ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को फिर से शामिल किया.

निष्कर्ष

‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को नौसेना के ध्वज में शामिल करने का फैसला साल 2004 में यूपीए सरकार के अस्तित्व में आने से पहले ही हो गया था.

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