अयोध्या में 18 जुलाई को राम मंदिर निर्माण कमेटी की मीटिंग हुई. मीटिंग में कमेटी के प्रमुख नृपेंद्र मिश्रा और एक इंजीनियर्स की टीम भी शामिल हुई. मीटिंग में राम मंदिर के प्रस्तावित मॉडल पर चर्चा हुई.
इस बीच सोशल मीडिया में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक कथित ट्वीट का स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है. ट्वीट में लिखा है कि अगर प्रदेश में सपा सरकार होती तो किसी भी हालत में अयोध्या में राम मंदिर न बनने दिया जाता.
वायरल ट्वीट
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट फर्जी तरीके से बनाया गया है. अखिलेश यादव ने ऐसा कोई ट्वीट नहीं किया है.
कथित रूप से 3 नवंबर, 2019 को किए गए इस ट्वीट के स्क्रीनशॉट में लिखा हुआ है, “हमारी सरकार होती तो मैं नेताजी के नक्शे-कदम पर चलता, चाहे जितनी जाने जाती लेकिन कभी राम मंदिर नहीं बनने देता.”
पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है. खबर लिखे जाने तक इस पोस्ट पर करीब एक हजार लोग कमेंट कर चुके थे और तकरीबन 1200 लोग इसे शेयर कर चुके थे.
दावे की पड़ताल
हमने पाया कि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा यह स्क्रीनशॉट फर्जी है. जब हमने ट्विटर एडवांस्ड सर्च की मदद से अखिलेश यादव के ट्विटर प्रोफाइल को सर्च किया, तो हमें 2 और 4 नवंबर, 2019 के ट्वीट्स तो मिले, पर 3 नवंबर का कोई ट्वीट नहीं मिला.
वेब पेज आर्काइव करने वाली वेबसाइट वेबैक मशीन पर भी हमें 3 नवंबर, 2020 को किया गया अखिलेश यादव का ऐसा कोई ट्वीट नहीं मिला. दावे के ठीक उलट हमने पाया कि अखिलेश यादव ने तो बीते साल राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उस पर कविता लिखकर अपनी सहमति जताई थी.
जो फ़ैसले फ़ासलों को घटाते हैं
वो इंसा को बेहतर इंसा बनाते हैं
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 9, 2019
इस पर कई मीडिया रिपोर्ट भी आई थीं. अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 9 नवंबर, 2019 को आया था.
वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट में ‘नेताजी’ के नाम से मशहूर मुलायम सिंह यादव का भी जिक्र है. साल 1990 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. 2 नवंबर, 1990 को अयोध्या में जब कुछ कारसेवकों ने विवादित ढांचे को गिराने की कोशिश की थी, तो पुलिस ने उन पर फायरिंग की थी. इस घटना में कई लोगों की जानें गई थीं.
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या गोलीकांड पर मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि भले ही और भी जानें जातीं, पर वह हर हाल में धर्म स्थल को बचाते. हालांकि, इस घटना के 25 साल बाद मुलायम सिंह यादव ने इस पर अफसोस भी जताया था. मीडिया में इस भी कई खबरें छपी थीं. बूमलाइव ने भी वायरल ट्वीट का फैक्ट चेक करते हुए इसका खंडन किया है.
जाहिर है कि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा अखिलेश यादव के ट्वीट का स्क्रीनशॉट फर्जी है. अखिलेश यादव ने ऐसा कोई ट्वीट नहीं किया है.