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फैक्ट चेक: पांच साल पुराना है बिजली संकट पर झारखंड सीएम हेमंत सोरेन का ये बयान

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि हेमंत सोरेन के नाम पर वायरल ये बयान साल 2017 का है, न कि अभी का. साल 2017 में हेमंत, नेता प्रतिपक्ष थे.

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झारखंड सीएम का ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. झारखंड सीएम का ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

कोयले की कमी के चलते इन दिनों देश के कई राज्यों में बिजली का संकट गहरा गया है. बिजली की सबसे ज्यादा किल्लत हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, बिहार, पंजाब, राजस्थान, केरल और झारखंड में है. इस बीच रेलवे ने कोयला माल ढुलाई बढ़ाने के लिए कई रेलगाड़ियों को भी रद्द कर दिया है.

इस घटनाक्रम के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को अपने राज्य के बिजली संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि अगर भारत सरकार ने, झारखंड सरकार का तकरीबन 1 लाख 30 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया होता, तो वो 25 क्या, 50 रुपये यूनिट बिजली भी खरीदकर लोगों को दे देते.

सोरेन का ये बयान तो चर्चा में है ही, इसके अलावा एक और कथित बयान उनके नाम पर ‘#हेमंत_सोरेन_शर्म_करो’ जैसे हैशटैग्स के साथ खूब शेयर किया जा रहा है. बयान ये है कि जब लोगों ने सोरेन को वोट ही नहीं दिया, तो उन्हें भला बिजली की समस्या से क्या लेना-देना? 

ये बयान एक अखबार की कटिंग में लिखा है, जिस पर हेडलाइन लगी है, ‘वोट ही नहीं दिया तो मुझे बिजली से क्या मतलब’. खबर में हेमंत सोरेन की फोटो लगी है और बताया गया है कि सोरेन ने ये बात बिजली संकट के विरोध में घेराव करने वाले राज्य के साहिबगंज जिले के बरहेट इलाके के छात्रों से कही.  

एक फेसबुक यूजर ने इस कटिंग के साथ लिखा, “जेएमएम की सरकार ने साफ-साफ शब्दों में जनता को संदेश दे दिया, जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं.” 

 

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि हेमंत सोरेन के नाम पर वायरल ये बयान साल 2017 का है, न कि अभी का. साल 2017 में हेमंत, नेता प्रतिपक्ष थे.

कैसे पता लगाई सच्चाई? 

कीवर्ड सर्च के जरिये तलाशने पर हमने पाया कि इस कटिंग को बहुत सारे सोशल मीडिया यूजर्स ने साल 2017 में शेयर किया था. इतनी बात तो यहीं साबित हो जाती है कि ये बयान वर्तमान में चल रहे बिजली संकट से संबंधित नहीं है.

अगर झारखंड सीएम हेमंत सोरेन ने सचमुच हाल-फिलहाल में ऐसा कोई बयान दिया होता, तो सभी प्रमुख न्यूज वेबसाइट्स में इसे लेकर खबर छपी होती. लेकिन, हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली.

वायरल हो रही खबर की कटिंग ‘दैनिक जागरण’ अखबार की है, लिहाजा हमने इसकी वेबसाइट और सोशल हैंडल्स को खंगालना शुरू किया. हमें 21 मई, 2017 की ‘दैनिक जागरण’ की एक रिपोर्ट मिली, जो वायरल खबर से काफी मिलती-जुलती है.

 

इसमें लिखा है कि बिजली संकट के मुद्दे को लेकर बरहेट, साहिबगंज के कुछ छात्र हेमंत सोरेन से मिलने गए थे, जो उस वक्त नेता प्रतिपक्ष और बरहेट क्षेत्र से झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी के विधायक थे. लेकिन सोरेन ने छात्रों को टका-सा जवाब दे दिया था कि बरहेट के लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया. इसलिए बिजली रहे या न रहे, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं. सोरेन के इस बयान से छात्रों को काफी निराशा हुई थी.

साल 2017 में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास थे, जो कि बीजेपी पार्टी से हैं.

जाहिर है, हेमंत सोरेन के एक पुराने बयान को अभी का बताकर उसे मौजूदा बिजली संकट से जोड़ते हुए वायरल किया जा रहा है.
 

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर

दावा

बिजली संकट के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बयान दिया है कि साहिबगंज जिले के बरहेट इलाके में बिजली रहे या न रहे उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है क्योंकि यहां के लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया.

निष्कर्ष

हेमंत सोरेन ने ये बयान हाल-फिलहाल में नहीं बल्कि साल 2017 में दिया था, जब वो नेता प्रतिपक्ष थे.

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जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

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सोशल मीडिया यूजर
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