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फैक्ट चेक: दरगाह पर मुंबई पुलिस की सलामी शिवसेना के इशारे पर नहीं, सौ साल पुराना है ये रिवाज

ऐसा कहा जा रहा है कि शिवसेना ने ये नया नियम बनाया है जिसके तहत अब मुंबई पुलिस को माहिम स्थित दरगाह में सलामी देनी होगी.

दरगाह पर मुंबई पुलिस की सलामी की असलियत (फोटो- आजतक) दरगाह पर मुंबई पुलिस की सलामी की असलियत (फोटो- आजतक)

बैंड-बाजे के साथ सूफी संत मखदूम अली माहिमी की दरगाह पर सलामी देते मुंबई पुलिस के जवानों का वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल है. ऐसा कहा जा रहा है कि शिवसेना ने ये नया नियम बनाया है जिसके तहत अब मुंबई पुलिस को माहिम स्थित दरगाह में सलामी देनी होगी.

सोशल मीडिया पर बहुत सारे लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए नाराजगी जता रहे हैं कि अगर पुलिस से दरगाह में सलामी दिलवाई जा रही है, तो भला मंदिर में क्यों नहीं? ऐसे ही एक फेसबुक यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “मुंबई पोलिस पीर हजरत मखदूम शाह को सलामी दे रही है. शिवसेना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है.”

इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि सोशल मीडिया पर सूफी संत मखदूम माहिमी की दरगाह पर मुंबई पुलिस के चादर चढ़ाने और सलामी देने की परंपरा तकरीबन 100 साल पुरानी है. शिवसेना की ओर से ये परंपरा शुरू करने का दावा बिल्कुल बेबुनियाद है.

फेसबुक पर बहुत सारे लोग इस वीडियो को सच मानते हुए शेयर कर रहे हैं. ट्विटर पर भी ये वीडियो काफी वायरल है. एक ट्विटर यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “मुंबई पोलीस पीर हजरत मखदूम शाह को सलामी दे रही है. क्या कभी किसी मंदिर में सलामी दी उधर तो बाला साहब की कब्र ही खोद डाला. शिवसेना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है...”

क्या है सच्चाई

हमने इनविड टूल की मदद से वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स निकाल कर उन्हें रिवर्स सर्च किया. ऐसा करने से हमें वायरल वीडियो ‘जज्बा न्यूज़’ नाम के एक यूट्यूब चैनल पर मिला. यहां इसके साथ कैप्शन लिखा है, “मुंबई पुलिस ने दी मखदूम शाह बाबा को सलामी”.

इस वीडियो में हमें एक और नई जानकारी भी मिली. इसमें नीचे की तरफ एक टिकर चल रहा है, जिस पर लिखा हुआ है, “मुंबई पुलिस की तरफ से हर साल की तरह पहले चादर पेश हुई माहिम की दरगाह पर.”

हमें ‘सबरंग’ वेबसाइट की एक रिपोर्ट मिली जिसमें साफ लिखा है कि माहिम की दरगाह में मुंबई पुलिस के चादर चढ़ाने की परंपरा तकरीबन 100 साल पुरानी है.  

‘स्क्रॉल’ वेबसाइट में भी इससे संबंधित एक रिपोर्ट है जिसमें इस परंपरा के पीछे की कहानी दी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, जिस जगह पर वर्तमान में माहिम पुलिस स्टेशन बना हुआ है, वहां पहले चौदहवीं शताब्दी के सूफी संत मखदूम अली माहिमी रहा करते थे. माहिम पुलिस स्टेशन मखदूम अली माहिमी की दरगाह से तकरीबन 200 ​मीटर की दूरी पर बना है. ऐसा रिवाज है कि हर साल संत के सालाना उर्स के मौके पर पहली चादर मुंबई के पुलिसकर्मी ही चढ़ाते हैं.

यानी ये बात साफ है कि मुंबई पुलिसकर्मियों के संत मखदूम अली माहिमी की दरगाह पर सलामी देने के वीडियो को राजनैतिक रंग देकर शेयर किया जा रहा है, ताकि लोगों में इसे लेकर भ्रम पैदा हो.

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

मुंबई पुलिस ने संत मखदूम अली माहिमी को सलामी दी. ऐसा शिवसेना पार्टी के इशारे पर हुआ.

निष्कर्ष

संत मखदूम अली माहिमी की दरगाह पर चादर चढ़ाने और वहां सलामी देने का रिवाज मुंबई पुलिस तकरीबन 100 सालों से निभा रही है.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
सोशल मीडिया यूजर्स
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