पिछले साल लॉन्च हुआ एक ऐप चीन में अचानक बेहद लोकप्रिय हो चुका. बड़े शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोग इस पेड सर्विस को डाउनलोड कर रहे हैं. ऐप का नाम अजीबोगरीब है- आर यू डेड. यह ऐप हर दो दिन में एक बटन क्लिक करने को कहता है. अगर आप चूके, तो आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को तुरंत अलर्ट चला जाएगा कि शायद आपको मदद की जरूरत है. ऐप की पॉपुलेरिटी से यह भी पता लगता है कि बड़ी आबादी के बीच भी लोग अकेलेपन से घिरते जा रहे हैं.
यह ऐप खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो अकेले रहते हैं. इस पेड सर्विस में यूजर को हर दो दिन में एक बार ऐप खोलकर एक बटन दबाना होता है. इसका मतलब होता है कि वह ठीक है. इसमें चूक होने पर किसी करीबी को मैसेज चला जाता है. ऐप किसने बनाया, इसपर कोई खास जानकारी नहीं मिलती सिवाय इसके कि तीन जेन-Z युवाओं ने इसे तैयार किया, जिन्होंने खुद को मूनस्केप टेक्नोलॉजी नाम से रजिस्टर किया हुआ है.
क्यों बढ़ रहा अकेलापन
ऐप के पीछे सोच है, अकेले रहने वालों की सुरक्षा पक्की करना. दरअसल चीन में अकेले रहने वाले तेजी से बढ़े. इस साल के कुछ महीनों में साढ़े 12 करोड़ लोग अकेले रहना चुन सकते हैं, या फिर अकेलापन उनके हिस्सा आ सकता है. साल 2030 तक ये आबादी 20 करोड़ से ऊपर चली जाएगी. इसमें नौकरी या पढ़ाई करने वाले ही नहीं, ऐसे लोग भी हैं, जिनके परिवार टूट चुके, या फिर जो चाहकर भी अपने लिए साथी नहीं खोज पा रहे.

चीन में शादी की घटती दर अकेलेपन की बढ़ती समस्या को और बढ़ा रही है. सरकारी डेटा के मुताबिक साल 2024 में देश में करीब 6.1 मिलियन जोड़ों ने शादी की, जो साल 2013 के मुकाबले लगभग आधा है. महंगाई, घर खरीदने की मुश्किल और बदलती जीवनशैली के कारण युवा शादी से दूर हो रहे हैं.
पहले चीन में जॉइंट फैमिली का चलन था, लेकिन लंबे समय तक चली वन-चाइल्ड पॉलिसी ने भी परिवार का स्ट्रक्चर बदल दिया. एक ही बच्चा होने से जॉइंट फैमिली अपने-आप छोटी होती चली गई. अब न्यूक्लियर फैमिली को भी पीछे करते हुए वन-पर्सन हाउसहोल्ड तेजी से बढ़ा और यही डराता है.
साउंडप्रूफ हो रही इमारतें
एक खतरनाक चीज और है. लोग अकेले तो हैं, साथ ही साउंडप्रूफ घरों में रह रहे हैं. असल में घनी आबादी और सटे हुए घरों की वजह से दीवारों को साउंडप्रूफ बनाया जाने लगा ताकि बाहर का शोर कम से कम आए. इससे अगर कोई बीमार हो और जरूरत में आवाज दे तो भी किसी को कुछ पता नहीं लग सकेगा.
वन-पर्सन हाउसहोल्ड का चलन तो साल 2010 से ही दिखने लगा था, लेकिन कोविड के दौरान इसका निगेटिव असर दिखने लगा. लंबे लॉकडाउन में लाखों लोग छोटे फ्लैट्स में बिल्कुल अकेले बंद रहे. कई मामलों में लोगों की तबीयत बिगड़ने या मौत होने तक किसी को पता नहीं चला. इसके बाद अकेले रहने वालों ने पहली बार खुलकर कहा कि उनका सबसे बड़ा डर है कि अगर जरूरत हो तो मदद के लिए कोई नहीं होगा. लोग पोस्ट करने लगे कि मरने पर भी किसी को पता नहीं लग सकेगा. इसी समय लोनली डेथ टर्म चर्चा में आया.

इसी बीच ये ऐप तैयार हुआ. अब यह सबसे तेजी से डाउनलोड किया जा रहा ऐप बन चुका, जिसकी मांग चीन ही नहीं, सिंगापुर, हांगकांग और मकाऊ में भी है. अकेले रहते लोगों को यह एक तरह का भरोसा देता है. आर यू डेड नाम पर हालांकि यूजर्स को एतराज है. कहा जा रहा है कि नाम में थोड़ा पॉजिटिव टोन आ जाए, जैसे आर यू ओके तो ज्यादा लोग इसे पसंद कर सकेंगे.
क्या जापान को पीछे छोड़ देगा चीन
जापान के बारे में भी कहा जाता रहा कि वहां अकेलापन तेजी से बढ़ रहा है. इसमें बड़ा हाथ वहां की बूढ़ी होती और घटती जनसंख्या का है. जापान में करीब 38 से 40 फीसदी घरों में एक ही शख्स रहता है. जबकि चीन में यह आंकड़ा लगभग 20 फीसदी के आसपास है. जापान ने इस अकेलेपन को सामाजिक संकट मानते हुए लोनलीनेस मिनिस्टर तक बना दिया, जो लोगों को अकेलपन से बचने की सलाह देते हैं, और तरीके निकालते हैं.
जापान भले ज्यादा मुश्किल में दिख रहा हो लेकिन चीन के साथ समस्या ज्यादा गंभीर है. बीजिंग में युवाओं और वर्किंग एज आबादी में अकेले रहने का ट्रेंड बीमारी की तरह बढ़ा. इसके साथ ही परिवार का कंसेप्ट टूट रहा है, जिसका सीधा असर आबादी पर हो रहा है. वो दिखाई भले बड़ी दे रही हो, लेकिन असल में एक जगह अटकी हुई है.