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रात 9 बजे के बाद दिल्ली की सड़कों पर नाचती है मौत... यहां पैदल चलना मौत के कुएं से कम नहीं!

दिल्ली में हर दिन चार लोगों की मौत सड़क हादसों में हो जाती है. दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है. इसमें बताया गया है कि रात 9 से 2 बजे के बीच सबसे ज्यादा मौतें होती हैं.

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दिल्ली में हर दिन चार लोगों की मौत सड़क हादसे में होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर- Meta AI)
दिल्ली में हर दिन चार लोगों की मौत सड़क हादसे में होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर- Meta AI)

राजधानी दिल्ली में होने वाले सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों को लेकर एक रिपोर्ट आई है. ये रिपोर्ट दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग की ओर से जारी की गई है. इस रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली में हर दिन चार लोगों की मौत सड़क हादसे में हो जाती है. 

चिंता बढ़ाने वाली बात ये है कि सड़क हादसों की संख्या और उनमें होने वाली मौतें प्री-कोविड लेवल पर पहुंच गई हैं. कोविड के दो साल 2020 और 2021 में सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों में कमी आई थी. लेकिन 2022 में फिर से ये आंकड़ा 2019 के स्तर पर पहुंच गया है. 2021 की तुलना में 2022 में ऐसे जानलेवा सड़क हादसों की संख्या में 28% की बढ़ोतरी हुई है.

'दिल्ली रोड क्रैश फैटलिटीज' नाम से आई इस रिपोर्ट में 2022 तक के आंकड़े दिए गए हैं. इसमें बताया गया है कि 2022 में राजधानी दिल्ली में 1,517 जानलेवा सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 1,571 लोगों की मौत हो गई थी. यानी, औसतन हर दिन 4 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो रही है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 50% लोग सड़क पर पैदल चल रहे थे. जबकि, 45% ऐसे थे जो या तो टू-व्हीलर या फिर थ्री-व्हीलर पर सवार थे. यानी, कुल 97% मौतें पैदल चलने वालों, मोटरसाइकिल या साइकिल चलाने वालों और ऑटो रिक्शा में सवार लोगों की हुई है.

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दिल्ली सरकार की ये रिपोर्ट बताती है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में ज्यादातर पुरुष होते हैं. दिल्ली में सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 89% पुरुष हैं. इतना ही नहीं, मरने वालों में ज्यादातर युवा होते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क हादसों में जान गंवाने वाले ज्यादातर 20 से 39 साल की उम्र के होते हैं. 2022 में दिल्ली में जितनी मौतें हुईं, उनमें से 609 की उम्र 20 से 39 साल के बीच थी.

ये रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में हुए 81% सड़क हादसे भारी वाहन और लाइट मोटर व्हीकल (LMV) की वजह से हुए. जबकि, 59% मामले हिट एंड रन के सामने आए थे. हिट एंड रन के मामलों में सबसे ज्यादा 57% मौतें पैदल चलने वाले यात्रियों की हुई है. उसके बाद टू-व्हीलर सवार (33%) थे.

रिपोर्ट बताती है कि अंधेरा चढ़ते ही सड़क हादसों की संख्या भी बढ़ जाती है. सबसे ज्यादा मौतें रात 9 बजे से 2 बजे के बीच होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, 35% से ज्यादा मौतें रात 9 से 2 बजे के बीच हुई थीं. इन पांच घंटों में 521 मौतें दर्ज की गई थीं. ये वो वक्त होता है जब हिट एंड रन के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं, क्योंकि रात के अंधेरे में लोग ज्यादा तेज स्पीड में गाड़ियां चलाते हैं.

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इतना ही नहीं, घातक सड़क हादसों के लिहाज से शनिवार, रविवार और सोमवार सबसे खतरनाक दिन हैं. इन्हीं तीन दिन में सबसे ज्यादा मौतें हुई थीं. इन तीन दिनों में 2022 में 674 यानी 45% मौतें हुई थीं.

सड़क हादसों और हिट एंड रन के मामलों में उत्तरी दिल्ली सबसे आगे हैं. 2022 में उत्तरी दिल्ली में 260 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें से 150 हिट एंड रन के मामले थे. इस मामले में उत्तर-पूर्वी दिल्ली सबसे ज्यादा सुरक्षित है. यहां 53 हादसे हुए थे, जिनमें 34 हिट एंड रन के मामले थे.

भारत की सड़कें सबसे खराब!

लंदन की यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सड़कों की क्वालिटी सबसे खराब है. भारत की सिर्फ 3% सड़कें ही नेशनल हाइवे हैं, जबकि 75% हाईवे सिर्फ दो लेन ही हैं. भारत की सड़कें बहुत कंजेस्टेड भी हैं. 40% सड़कें गंदी होती हैं और 30% से ज्यादा गांवों में अभी तक सड़क नहीं पहुंची है. 

पिछले साल रोड सेफ्टी पर वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट आई थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में दुनिया की सिर्फ 1% गाड़ियां ही हैं, लेकिन दुनियाभर में होने वाले 11% सड़क हादसे यहीं होते हैं. यानी, हर 100 हादसों में से 11 हादसे भारत में होते हैं.

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वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल सड़क हादसों में 1.50 लाख मौतें हो जाती हैं, जबकि 7.50 लाख से ज्यादा लोग विकलांग हो जाते हैं. हादसों का शिकार होने वालों में ज्यादातर पैदल या साइकिल पर चलने वाले लोग होते हैं. 

वहीं, 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भी रोड सेफ्टी पर रिपोर्ट आई थी. इस रिपोर्ट में 2016 के आंकड़े दिए गए थे. इसके मुताबिक, सबसे ज्यादा सड़क हादसे अमेरिका और जापान में होते हैं, लेकिन मौतें भारत में होतीं हैं. अमेरिका में 22 लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं में 37,461 लोगों की मौत हुई थी. जबकि, भारत में करीब 5 लाख हादसों में 1.50 लाख से ज्यादा मौतें हो गई थीं. 

दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट बताती है कि न्यूयॉर्क (अमेरिका) में होने वाले हर 30 में से एक सड़क हादसे में मौत होती है. जबकि, टोक्यो (जापान) में होने वाले हर 59 सड़क हादसों में से एक में किसी न किसी की मौत होती है. वहीं, दिल्ली में हर चौथा सड़क हादसा जानलेवा होता है.

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट बताती है कि एक दशक (2011-2020) में भारत में 13 लाख से ज्यादा मौतें हुई थीं, जबकि 50 लाख से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

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