
पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश बनने से लगभग सालभर पहले एक ऐसा तूफान आया था, जिसमें लाखों लोग मारे गए थे. उस तूफान का नाम 'भोला' था.
इस तूफान को 'द ग्रेट भोला' भी कहा जाता है. इसे अब तक का सबसे 'खतरनाक' और 'जानलेवा' तूफान कहा जाता है, क्योंकि ये अपने साथ भयंकर तबाही लेकर आया था. आठ नवंबर 1970 को ये तूफान बंगाल की खाड़ी में बनना शुरू हुआ था और 12-13 नवंबर को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के तट से टकराया था.
ये तूफान इतना शक्तिशाली था कि इसकी वजह से समंदर में 20 फीट ऊंची लहरें उठने लगी थीं. लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं. तटीय और गंगा डेल्टा के निचले मैदान में रहने वाले लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला था.
इस तूफान में कितने लोग मारे गए? इसका कोई आधिकारिक और सटीक आंकड़ा नहीं है. वर्ल्ड मीटियरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने इस तूफान में तीन से पांच लाख लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया है.
कैसे हुआ इतना नुकसान?
- इसे समझने के लिए बांग्लादेश की जियोग्राफी समझनी पड़ेगी. बांग्लादेश हमेशा से चक्रवाती तूफानों के लिए संवेदनशील रहा है.
- दरअसल, बांग्लादेश का 35 फीसदी इलाका समुद्र से 6 मीटर यानी 20 फीट से भी कम ऊंचाई पर है. इसका 20 फीसदी इलाका हर साल बाढ़ में डूब जाता है. साथ ही इसका 575 किलोमीटर का तटीय इलाका, इसे आसानी से तूफानों का शिकार बना देता है.
- बांग्लादेश में हर साल औसतन पांच तूफान आते हैं. कुछ रिपोर्ट्स बतातीं हैं कि भोला तूफान ने बांग्लादेश के 85 फीसदी घरों को उजाड़ दिया था.

कितना खतरनाक था ये तूफान?
- बताया जाता है कि चिटगांव में मौसम केंद्र ने 144 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार की हवाओं को दर्ज किया था. 45 मिनट बाद हवाओं की रफ्तार 222 किलोमीटर प्रतिघंटा हो गई थी.
- जैसे ही भोला तूफान बांग्लादेश के तटीय इलाके से टकराया, वैसे ही समंदर में 10 मीटर (33 फीट) ऊंची लहरें उठने लगी थीं.
- रेडियो पाकिस्तान ने दावा किया था कि चिटगांव के पास बने 13 द्वीपों में कोई जिंदा नहीं बचा था. चिटगांव के बंदरगाहों पर समुद्री जहाज क्षतिग्रस्त हो गए थे. साथ ही चिटगांव के एयरपोर्ट और कॉक्स बाजार में कई घंटों में तक 1 मीटर से ज्यादा पानी भरा हुआ था.
- इस तूफान की वजह से 36 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे. इलाके के 77 हजार मछुआरों में से 46 हजार मारे गए थे और जो जिंदा बचे थे, वो गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे. कुल मिलाकर तटीय इलाके का 65 फीसदी मछली उद्योग पूरी तरह तबाह हो गया था.

भारत पर क्या हुआ था असर?
- मौसम विभाग की रिपोर्ट बताती है कि नवंबर 1970 में आए भोला तूफान का भारत पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ा था. हालांकि, इसकी वजह से तटीय इलाकों के आसपास भारी बारिश जरूर आई थी.
- मौसम विभाग के मुताबिक, कलकत्ता से कुवैत जा रहा साढ़े पांच हजार टन वजनी मालवाहक जहाज 12 नवंबर को समंदर में डूब गया था. इसमें सवार सभी 50 लोगों की मौत हो गई थी.
- तूफान की वजह से आई भारी बारिश ने काफी नुकसान पहुंचाया. पश्चिम बंगाल और दक्षिणी असम में भी जोरदार बारिश हुई. दोनों ही राज्यों में बारिश की वजह से सैकड़ों घर और फसल बर्बाद हो गई थी.

इसी तूफान से बना बांग्लादेश!
- ये तूफान ऐसे समय में आया था, जब पाकिस्तान में आम चुनाव में महीनेभर का समय भी नहीं बचा था. तूफान की वजह से इन चुनावों को जनवरी 1971 तक टाल दिया गया.
- इस तूफान ने पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य शासन के खिलाफ असंतोष को बढ़ा दिया था. लोग पाकिस्तानी सरकार की ओर से दी जा रही मदद से नाखुश थे.
- पूर्वी पाकिस्तान के लोग पहले से ही पाकिस्तानी सरकार से नाराज थे. वहां आवामी लीग पार्टी के नेता शेख मुजीबुर्रहमान की अगुवाई में आंदोलन चल रहा था.
- तूफान की वजह से ये नाराजगी और बढ़ गई. मार्च आते-आते यहां हालात गृहयुद्ध जैसे बन गए. बाद में पाकिस्तानी सरकार ने यहां सेना भी उतार दी.
- हालत इतने बिगड़ गए कि दिसंबर 1971 को भारत और पाकिस्तान के बीच जंग भी हो गई. इस जंग ने ही पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए और बांग्लादेश को नया देश बना दिया.