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सत्ता-विपक्ष के सियासी खेल में किसान बने ‘कठपुतली’

सत्ता-विपक्ष के सियासी खेल में किसान बने ‘कठपुतली’

देश में किसान आत्महत्या का मुद्दा बड़ा ही गंभीर है. आज हालात ऐसे हैं कि किसान का बेटा किसान नहीं बनना चाहता है क्योंकि वह जानता है कि उनकी आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया. सरकारें आती हैं, चली जाती हैं लेकिन किसानों को मिलते हैं सिर्फ वादे. जो सत्ता में होते हैं वो किसानों को भूल जाते हैं. जो विपक्ष में होते हैं वो उन्हें सत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बना लेते हैं. कुल मिलाकर किसान की जिंदगी कठपुलती का खेल बनकर रही है. वीडियो देखें.

The issue of farmer suicides in the country is very serious. Today the situation is such that the farmer son does not want to be a farmer because he knows that there was no improvement in their economic condition. Governments come, go away but farmers meet only promises. Those who are in power forget the farmers. Those who are in the opposition make them a ladder to reach power. Overall, the life of the farmer is playing a game of puppets. Watch the video.

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