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एजेंडा आजतक के मंच पर पीएम मोदी के इस कदम को बताया गया असंवैधानिक

एजेंडा आजतक के कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि जीएसटी स्लैब पर कोई भी फैसला जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में लिया जाएगा. इससे पहले इसका ऐलान करना असंवैधानिक है.

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 एजेंडा आजतक के मंच पर अमित मित्रा, जयंत सिन्हा और मनीष तिवारी (फोटो-aajtak)
एजेंडा आजतक के मंच पर अमित मित्रा, जयंत सिन्हा और मनीष तिवारी (फोटो-aajtak)

आजतक के विशेष कार्यक्रम 'एजेंडा आजतक' के दूसरे दिन केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, पश्चिम बंगाल सरकार के वित्त मंत्री डॉ. अमित मित्रा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने देश में हो रहे आर्थिक सुधार पर चर्चा की. इस दौरान अमित मित्रा ने जीएसटी स्लैब को कम करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान को असंवैधानिक करार दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पास कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है कि वह किसी वस्तु पर जीएसटी स्लैब कम करने का संकेत दे.

जीएसटी पर बनी एम्पावर्ड कमिटी ऑफ स्टेट फाइनेंस मिनिस्टर्स के चेयरमैन अमित मित्रा ने कहा कि हमने शुरू से ही अधिकतर वस्तुओं (शराब, लग्जरी वस्तु छोड़कर) को 28 फीसदी के जीएसटी दायरे से घटाकर 18 फीसदी करने की पैरवी की थी, लेकिन यह फैसला उस समय नहीं लिया गया. पीएम मोदी को कोई अधिकार नहीं है कि वह जीएसटी स्लैब पर कोई ऐलान करें. यह फैसला जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में लिया जाएगा.   

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उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो वह जीएसटी का विरोध करते थे, लेकिन देश की सत्ता संभालते ही वह पलट गए. हमने जल्दबाजी में जीएसटी को लागू करने का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि जीएसटी में अभी कई कमियां है. यह एक तरह से हवाला और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है.

वहीं, कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि अगर आप विपक्ष में है तो साबित करना चाहेंगे कि अर्थव्यवस्था सही नहीं चल रही है. पहली बात दुनिया के हिसाब से हमारा विकास दर बढ़ रहा है. दूसरी बात जीएसटी, नोटबदली जैसे बड़े सुधार से में गति आई है. महंगाई 3-4 फीसदी पर है. उत्पादन करने की क्षमता बढ़ी है. विपक्ष आंकड़ों का खेल खेल रही है.

कांग्रेस की ओर से अपना पक्ष रखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि हाल में हुए चुनावों के दौरान हमने देखा कि सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है. 2014 में हर साल 2 करोड़ देने का वादा किया गया था. लेकिन 8 लाख 23 हजार रोजगार के अवसर अभी तक दिए गए है. किसान आंदोलन कर रहे हैं, व्यापारी वर्ग परेशान है. अगर इनकी अर्थव्यवस्था सही चल रही होती तो तीन राज्यों में हार नहीं होती.

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