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'अब मैं बचूंगी नहीं...' जब सड़क से घसीटते हुए जंगल में ले जाने लगा शख्स, चीखती रहीं Ratan Raajputh और देखते रहे लोग...

रतन राजपूत ने अपने लेटेस्ट व्लॉग में दिल्ली में उनके साथ हुए एक हादसे के बारे में बताया है. दरअसल, रतन ने अपने लिए एक नया फोन लिया है. फोन खरीदते समय उन्हें अपने पहले फोन की स्टोरी याद आ गई. रतन राजपूत ने कहा- जब में पटना से दिल्ली गई थी. उस टाइम फैमिली में सबसे पहला फोन मैंने ही लिया था. मैं उस समय दिल्ली में खिड़की से मंडी हाउस जाती थी अपने ड्रामा की प्रैक्टिस करने. एक दिन मैं अपने नए फोन के साथ लौट रही थी. 

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रतन राजपूत रतन राजपूत

रतन राजपूत ने टीवी की दुनिया से भले ही दूरी बनाई हुई है. लेकिन वो अपने यूट्यूब व्लॉग्स के जरिए फैंस संग कनेक्टेड रहती हैं. रतन अपने यूट्यूब चैनल पर अपनी लाइफ से जुड़े सीक्रेट्स लोगों के साथ शेयर करती रहती हैं. अब रतन ने अपने साथ हुए एक ऐसे इंसीडेंट के बारे में बताया है, जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. 

जब रतन ने लिया था पहला फोन...

रतन राजपूत ने अपने लेटेस्ट व्लॉग में दिल्ली में उनके साथ हुए एक हादसे के बारे में बताया है. दरअसल, रतन ने अपने लिए एक नया फोन लिया है. फोन खरीदते समय उन्हें अपने पहले फोन की स्टोरी याद आ गई. रतन राजपूत ने कहा- जब में पटना से दिल्ली गई थी. उस टाइम फैमिली में सबसे पहला फोन मैंने ही लिया था. मैं उस समय दिल्ली में खिड़की से मंडी हाउस जाती थी अपने ड्रामा की प्रैक्टिस करने. एक दिन मैं अपने नए फोन के साथ लौट रही थी. 

रतन ने कहा- मैं मां से फोन पर बात कर रही थी, अचानक मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे कान के पास खींचा-तानी कर रहा है. मुझे कुछ समझ नहीं आया उस समय. एक लड़का मेरे हाथ से मेरा फोन खींच रहा था. लोग देख रहे थे. मैं चीख रही थी कि मेरा फोन छोड़ों. मैं लोगों से बोल रही थी कि मेरी मदद करो, मेरा फोन लेकर भाग रहा है. लेकिन सब देखे जा रहे थे. 

जब रतन को लगा अब नहीं बचूंगी...

रतन ने आगे बताया- शाम के 8.30 बजे थे. मैं उस शख्स के पीछे बहुत दूर चली गई. तभी अचानक एक लड़का आया, मैंने उसे कहा कि मेरी मदद कर दो. उस लड़के ने मेरा जोर से हाथ पकड़ा और मुझे घसीटते हुए कहने लगा, चल तुझे तेरा फोन दिलाता हूं. वो मुझे जंगल की ओर खींच रहा था. उस समय मुझे लगा अब तो मैं गई. मुझे लगा कि मैं अब बचूंगी या नहीं. मैं चिल्ला रही थी और लोग सिर्फ देख रहे थे. 

उन्होंने आगे कहा- मुझे लगा अब मैं और ताकत नहीं लगा सकती. मैं चिल्ला रही थी, कोई मुझे बचाओ. तभी दो लड़के स्कूटर पर जा रहे थे. उनमें से एक मेरी मदद के लिए आया और लड़के ने उस शख्स से कहा- छोड़ इसका हाथ, तो वो शख्स कहने लगा- नहीं छोड़ूंगा, ये मेरी है. 

रतन ने बताया कि जिन लड़कों ने उनकी मदद की वो दिल्ली NIFT के स्टूडेंट्स थे. उन्होंने रतन को घर तक पहुंचाया. रतन ने कहा कि अब वो समझ सकती हैं, जिनके साथ कुछ ऐसी घटना होती है तो वो किस फेज में होते हैं.

रतन ने कहा- मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि आज मैं न्यूज बन सकती थी. मेरे साथ वही हो सकता था, जो मैं न्यूज में देखती हूं. मैं किसी गटर में फेंक दी गई होती, या मुझे मार दिया गया होता. रतन ने कहा कि तबसे उनके मन में डर बैठ गया. उन्हें लगा मैं लड़की हूं, मुझे संभलकर रहना होगा.

 

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