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Eid 2021: घर पर ईद मनाएंगे टीवी स्टार, बोले- सेलिब्रेशन से ज्यादा जकात पर ध्यान दें

शमा सिकंदर ने कहा- इस बार जो भी आसपास हो रहा है, जाहिर सी बात है कोई सेलिब्रेशन नहीं होगा. मेरे अपने परिवार वाले अस्पताल में हैं, ऑक्सीजन के लिए लड़ रहे हैं. मेरा दिन रात फोन पर कभी ऑक्सीजन, तो कभी बेड की जुगाड़ पर गुजरता है.

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शाहीर और शमा
शाहीर और शमा

पूरे देश में आए कोरोना के सेकंड वेव ने पर्व-त्योहार के उत्साह को खत्म कर दिया है. पिछले कुछ महीनों में बढ़ती मौत की संख्या देख कई लोग सहम से गए हैं. कोरोना का कहर इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री कई आर्टिस्ट पर भी बरपा है. कईयों ने अपनी जान गवाई, तो कईयों से उनके अपने छूटे. ऐसे में ऐक्टर्स अब बस इस बुरे दौर के बीत जाने की उम्मीद में हैं. इस साल ईद के मौके पर स्टार्स अपने करीबियों और देश की सलामती की दुआ में लगे हैं. साथ ही फैंस से भी उनकी यही गुजारिश है कि वे बाहर जाने के बजाय घरों पर ही अपनी नमाज अदा करें. पेश है यह रिपोर्ट... 


मेरे लिए क्या ईद... फिलहाल ऑक्सीजन के जुगाड़ में हूं - शमा सिकंदर
शमा सिकंदर ने कहा-  'इस बार जो भी आसपास हो रहा है, जाहिर सी बात है कोई सेलिब्रेशन नहीं होगा. मेरे अपने परिवार वाले अस्पताल में हैं, ऑक्सीजन के लिए लड़ रहे हैं. मेरा दिन रात फोन पर कभी ऑक्सीजन, तो कभी बेड की जुगाड़ पर गुजरता है. राजस्थान में रह रही मेरी सगी चाची का ऑक्सीजन लेवल काफी गिर चुका है. हमने ऑक्सीजन इकट्ठा करने के लिए कितना जैक लगाया है, तब जाकर कुछ मिला है. अगर हमारी इतनी जान-पहचान नहीं होती, तो फिर हमारा क्या होता. हमें सिस्टम पर तो कोई यकीन नहीं रहा. बस कुछ मसीहा हैं, जो लोगों की मदद कर रहे हैं. लोग अब एक दूसरे की मदद के लिए जुटे पड़े हैं. मेरी बहन को कोविड हुआ था, परिवार इससे अछूता नहीं रहा. मेरे बहुत ही करीबी दोस्त रवि बहल की बहन का देहांत हो गया. इतना कोहराम मचा है चारो तरफ, कैसे मनाएं कोई त्यौहार. सबसे बुरी बात यह है कि लोग अपनी वजह से नहीं बल्कि सिस्टम के फैल्यॉर से मर रहे हैं. उनकी जवाबदेही कौन देगा. बस इस ईद के मौके पर दुआ करें कि यह जो दौर है वो गुजर जाए.'

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अब्बा की सलामती के लिए पहली बार ईद में उनसे दूर हूं - एजाज खान
एजाज खान ने कहा, 'इस साल भी सेलिब्रेशन जैसा कुछ नहीं है. बस फोन पर ही ईद की दुआएं एक दूसरे को देंगे. अब्बा पास में ही रहते हैं, लेकिन उनके घर नहीं जाऊंगा क्योंकि पिछले दस दिनों से बुखार में था, हालांकि कोविड नेगेटिव हूं. अब्बा से अभी ही फोन पर बात हो रही थी, उन्हें यही कहा कि मैं उनसे मिलने नहीं जा सकता. मैं किसी भी तरह का रिस्क लेना ही नहीं चाहता. यह वेव बहुत ही खतरनाक है. मेरे दो करीबी दोस्त अस्पताल में ऑक्सीजन के सपोर्ट में हैं. अब्बा की उम्र भी काफी हो चुकी है.  मैं एक महीने से उनसे नहीं मिला. जबकि हमारे घर का फासला महज आधे घंटे का होगा. मैं उनकी सलामती के लिए उनसे दूर हूं. पहली ईद होगी, जब अब्बा के साथ नहीं हूं. बस घर पर नमाज पढ़ी जाएगी और सेवइयां बनाई जाएगी. मैं सभी से दरख्वास्त करना चाहता हूं कि आप जमात में जाकर नमाज न पढ़ें, घर पर रहें. अल्लाह बहुत समझदार है और सबको प्यार करता है. जरूरी नहीं है कि हम मस्जिद जाएं. आप जकात निकालकर जितने लोगों की मदद कर सकते हैं, करें.'

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प्लान तो बहुत कुछ किया था, लेकिन अभी सुरक्षा पहली प्राथमिकता - रक्षंदा खान
रक्षंदा खान बोलीं- 'मैं सोच रही थी बाहर जाऊंगी, मॉल्स से नए कपड़े खरीदूंगी, पार्टीज में लोगों से मिलूंगी. उम्मीदें तो इन सब चीजों की लगा रखी थी लेकिन रियलिटी तो कुछ और ही है. इंस्टाग्राम पर हम देखते हैं न, एक्सपेक्टेशन और रियलिटी. अब जो माहौल है, तो हमें स्वीकार कर लेना चाहिए क्योंकि एक दिन में हालात तो बदलने वाले नहीं हैं. अभी जो सबसे जरूरी है, वो है कि हम सब एक साथ सुरक्षित रहें. जिन परिवार वालों ने कुछ नहीं खोया है और घरों पर सुरक्षित है, बस यही वजह हो जानी चाहिए ईद मनाने की. अभी फिलहाल लोग जूम व वीडियो कॉल पर ही ईद मनाएं, तो बेहतर है. जब सब चीजें नॉर्मल हो जाएंगी, तो वापस से ईद मना लिया जाएगा. लोग एक दूसरे की मदद करें, लेकिन उसे सोशल मीडिया पर जाहिर न करें.  मैं तो मानती हूं कि यह समय अच्छा है बच्चों को रमजान के सही मायने समझाने के. उन्हें यह समझ आएगी कि कमी में भी चीजों को कैसे हैंडल किया जाता है. इंसान कई बार चीजें आसान परिस्थिति में नहीं सीख पाता है, टफ टाइम उन्हें सीखा जाती हैं. टफ टाइम हमेशा के लिए नहीं रहता लेकिन टफ लोग हर स्थिति में संभल जाते हैं.'

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बस घर पर रह कर शीर कोरमा बनाऊंगी - अदा खान
'हम देख रहे हैं कि देश का बुरा हाल है. हर कोई हताश-निराश है. ऐसे में सेलिब्रेट करने का बिल्कुल भी मन नहीं है. मैं इस बार मुंबई में ही परिवार संग ही इसे मनाऊंगी. घर पर ही रहकर हम दुआ करेंगे. पारंपरिक तरीके से मीठा बनने का रिवाज है, मैं शीर कोरमा बनाऊंगी. लॉकडाउन में परिवार संग मिल नहीं सकते, तो हम वीडियो कॉल से कनेक्ट रहेंगे. दुआ यही रहेगी कि कोरोना जल्द से जल्द खत्म हो जाए, जो बीमार हैं, वो ठीक हो जाएं. बीते साल की ईद तो मेरे जेहन से जा नहीं सकती. मैंने अपनी मौसी को खो दिया था. ईद के एक दिन पहले ही मौसी नहीं रही थी. तो हमने कुछ भी नहीं किया था. इस साल भी सबकी सलामती के लिए ही ईद मनाऊंगी.'

ऑनलाइन जमात देखकर नमाज अदा करूंगा-अली असगर
'इस साल ईद की कोई तैयारी नहीं है. हालात तो बहुत बुरे हैं, लॉकडाउन का दूसरा साल हो चुका है. मैं तो घर पर ऑनलाइन जमात देखकर ही अपनी नमाज अदा करूंगा. बस इससे ज्यादा कुछ भी नहीं, क्योंकि जो हालात हैं, न ही मौजूं है जश्न मनाने का और न ही मन. मैंने अपने कई करीबी दोस्तों को खोया है. सच कहूं, तो दिल बैठ चुका है. बहुत कोशिश करता हूं कि निगेटिव न होऊं लेकिन हर दिन एक बुरी खबर ने तोड़कर रख दिया है.  किसी दोस्त व रिश्तेदार के बीमार होने की खबर आती है, तो दिल दहल सा जाता है. ऊपरवाले का शुक्र है कि हम परिवार वाले एक साथ घर पर बैठे हैं. यही ईद है मेरे लिए. मैं तो हर नमाज और इबादत में माफी मांग रहा हूं कि हम इंसानों को माफ कर दो. अब तो डॉक्टर्स भी यही कह रहे हैं कि दुआ काम आएगी. पावर, पैसा कुछ काम नहीं आ रहा है.'

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इस बार सेलिब्रेशन से ज्यादा जकात पर ध्यान दें - शहीर शेख
'लॉकडाउन की वजह से हम कहीं बाहर नहीं जा सकते और न ही किसी को घर पर बुला सकते हैं.  हमारे यहां जकात का ट्रेडिशन है, जिसमें लोगों की मदद की बात कही गई है. मैं वो जितना हो सके करने की कोशिश करूंगा. लोगों से भी कहूंगा कि इस वक्त जितनी हो सके और जैसे हो सके, जरूरतमंद की मदद के लिए आगे आएं.'

 

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