इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत और दरिया जैसे गाने बॉलीवुड को देने वाले प्लेबैक सिंगर शाहिद मलया ने इंडिया टुडे के सफाईगीरी अवॉर्ड्स के पांचवें संस्करण में शिरकत की. यहां शाहिद ने म्यूजिक में सफाई पर अपना रिएक्शन दिया.
आप क्लासिकल म्यूजिक सुनते हैं उसके बारे में सोचते हैं कि अब बॉलीवुड में इसे लेकर काम कम हो रहा है. अब वो क्लास कही खोता जा रहा है. बस पुरानी फिल्मों के गानों को रीमेक किया जा रहा है, बॉलीवुड में म्यूजिक की सफाई क्यों खोती जा रही है?
इस सवाल के जवाब में शाहिद ने कहा- 'मेरे हिसाब से दौर बदल रहा है. मौसम बदलता है. इंसान वही है लेकिन उनके कपड़े आज कैसे बदल गए हैं. मेरे हिसाब से गानों के साथ भी ऐसा हो रहा है. पहले गानों में दो-चार इंस्ट्रूमेंट होते थे. फिर 10-12 हुए, फिर 15-20 हुए. आज इतने सारे इंस्ट्रूमेंट हैं कि सिंगर भी इंस्टूमेंट बन गया है. साउंड इतना ऊपर होता है कि सिंगर दब जाते हैं. लिरिक्स याद हो इसके लिए स्क्रीन पर दिखाए जाते हैं. बहुत कंफ्यूजन है. लेकिन बहुत अच्छा म्यूजिक भी बन रहा है. लोग अपने हिसाब से म्यूजिक सुनते हैं. घी खाने वाले डालडा नहीं खाते. क्लासिकल म्यूजिक एक शुद्ध म्यूजिक है.'
मुंबई में सफाई एक बड़ी समस्या रही है, क्या इस पर सेल्बेस को बोलने की जरूरत है?
शाहिद ने कहा - मैं बहुत बड़ा स्टार नहीं हूं लेकिन जब मुझे बुलाएंगे तो मैं जरूर करुंगा. मैं वैसे भी अपने मोहल्ले में सफाई करता रहता हूं. लोगों को अपने लेवल पर सफाई करते रहना चाहिए. हर कदम पर सफाई की जरूरत है. घर, गली मोहल्ला और शहर सभी जगह सफाई की जररूत है. घर साफ है तो मोहल्ला अपने आप साफ हो जाएगा. सबसे पहले खुद को साफ रखना जरूरी है.