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Mahabharat 15th May Episode Update: लाक्षागृह में हुआ सुरंग का निर्माण, पांडवों की मौत से दुखी हस्तिनापुर

युधिष्ठिर संग सभी पांडव भाइयों को मारने की शकुनि की साजिश कामयाब रही या फिर हुआ कुछ और? शुक्रवार को आया महाभारत का एपिसोड नए ट्विस्ट से भरा हुआ था. हम आपको दे रहे हैं इस एपिसोड की पूरी अपडेट.

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महाभारत
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गांधार नरेश शकुनि ने पुरोचन से सांठ गांठ करके एक षड़यंत्र रचा और वो सफल भी हो गया. दुर्योधन और कर्ण जैसे वीर योद्धा भी षडयंत्रकारी बन गए और उधर युधिष्टर ने वारणावत जाने की तैयारी भी कर ली है. शुक्रवार को आया महाभारत का एपिसोड नए ट्विस्ट से भरा हुआ था. हम आपको दे रहे हैं इस एपिसोड की पूरी अपडेट.

पांडवों की वारणावत जाने की योजना

शकुनि को चिंतित देख दुर्योधान और दुशाशन उसका कारण पूछते हैं. तब शकुनि अपना नया पांसा फेंकता है कि अगर युधिष्ठिर अकेले वारणावत जाता है, तो बाकी चार पांडव और कुंती दुर्योधन के हाथ कुछ नहीं लगने देंगे. इसीलिए वो नया षड़यंत्र रचने में लगा है और युधिष्ठिर के साथ चारों पांडव और कुंती को भेजने का उपाय ढूंढ रहा है. लेकिन उसे डर है कि कहीं विदुर को इसकी भनक ना लग जाए.

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यहां गांधारी और कुंती अपने पुत्रों की एकता की गलतफहमी की शिकार हैं और दुर्योधन के छल से अनजान दोनों इस बात पर खुश हैं कि दुर्योधन ने वारणावत में युधिष्ठिर के लिए एक बड़ा भवन बनावाया है. उधर भीम को दुर्योधन पर संदेह है और वो ये बात युधिष्ठिर के सामने भी रखते हैं, लेकिन युधिष्ठिर मानने को तैयार नहीं. बाकी पांडव भाई भी निर्णय लेते हैं युधिष्ठिर को अकेले नहीं जाने देंगे.

इस पर युधिष्ठिर सभी को कहते हैं कि अगर मां कुंती साथ जाने की आज्ञा दे दें और यदि मां कुंती भी साथ चले तो इससे अच्छा क्या होगा. तभी वहां कुंती भी आ जाती हैं और युधिष्ठिर उनसे सभी के साथ वारणावत जाने की आज्ञा मांगता है और कुंती तैयार हो जाती हैं.

इधर विदुर को वारणावत से एक समाचार मिलता है कि पुरोचन ने भवन बनवाने के लिए मख्खन, तेल, चर्बी, भूसा और लाख का इस्तेमाल किया है. उधर युधिष्ठिर, धृतराष्ट से अपने भाइयों और मां कुंती को साथ ले जाने की आज्ञा लेने आते हैं. ये सुनकर दुर्योधन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उसने ये समाचार अपने शकुनि मामा को दिया, जिसे सुनकर शकुनि भी खुश हो गया.

पांडवों का वारणावत की ओर प्रस्थान

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पांचों पांडवों के वारणावत जाने से पहले विदुर उनसे मिलने आते हैं. इस से पहले की विदुर उन्हें कोई सुचना दे, तभी वहां शकुनि और दुर्योधन भी आ जाते हैं. लेकिन विदुर बातों-बातों में पांडवों को संकेत दे ही देते हैं कि कहीं तो आग लगने वाली है. अगले दिन पांचों पांडव अपनी मां कुंती के साथ वारणावत की ओर प्रस्थान करते हैं. रात में जब विश्राम करने के लिए पांचो पांडव एक जगह रुकते हैं तो युधिष्ठिर अकेले बाहर बैठकर काका विदुर की कही गई बात पर विचार करते हैं. तभी वहां अर्जुन आते हैं और युधिष्ठिर से चिंतित होने का कारण पूछते हैं. इसपर युधिष्ठिर अर्जुन से कहते हैं कि वारणावत के लिए निकलने से पहले काका विदुर ने दुर्योधन और शकुनि के सामने हमसे यह सवाल क्यों किया की वन में आग लगती है तो कौन सुरक्षित रहता है. इन सवालों से युधिष्ठिर ने आने वाले खतरे को भांप लिया और निर्णय लिया कि आज के बाद से रात में एक भाई पहरा देगा.

लाक्षागृह की सुरंग का निर्माण

अगली सुबह जब पांचों पांडव मां कुंती के साथ वारणावत पहुंचते हैं, तो पुरोचन उनका स्वागत कर अपने हाथों द्वारा बनाया गया भवन दिखता है. कुंती आने वाले खतरे से अनजान है लेकिन पांचों पांडवों को ये ज्ञात हो गया है कि इस भवन में आग जरूर लगेगी. इसीलिए युधिष्ठिर ने आग से बचने के लिए बिल खोदने का फैसला लिया. लेकिन इस बात की किसी को भनक ना लगे, इसलिए उन्होंने एक अनुभवी सुरंग खोदने वाले की खोज करने को कहा. तभी वहां वारणावत के मंत्री, युधिष्ठिर के दर्शन करने आते हैं साथ ही एक खनिक भी आया जिसे देखकर युधिष्ठिर समझ गए कि ये खनिक काका विदुर द्वारा ही भेज गया है. उस खनिक ने अपना काम करना शुरू कर दिया और सुरंग खोदने लगा. पांडव वारणावत का भ्रमण करने का बहाना कर सुरंग का परीक्षण करते हैं.

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यहां हस्तिनापुर में दुर्योधन और शकुनि बहुत खुश हैं और इंतजार कर रहे हैं कि पांचों पांडव और कुंती के जलकर मर जाने के समाचार का आए. वहीं विदुर को भी समाचार मिलता है कि अमावस की रात को पुरोचन लाक्षागृह में आग लगाएगा. विदुर ये समाचार युधिष्ठिर तक पहुंचा देते हैं और आदेश देते हैं युधिष्ठिर अपने भाइयों और मां कुंती के साथ अमावस की रात के पहले ही दिन में वहां से निकल जाएं. उधर अर्जुन भी खनिक के पास ये संदेश लेकर जाते हैं और दो दिन में सुरंग तैयार करने को कहते हैं. अमावस की रात से पहले की रात उस खनिक ने अपना काम पूरा कर दिया और सुरंग का द्वार युधिष्ठिर के कक्ष में खोल दिया.

पांडवों का लाक्षागृह से पलायन

अमावस की रात को पुरोचन सैनिक के साथ लाक्षागृह में आग लगाने निकल पड़ते हैं और वन के उन वासियों को लाक्षागृह के आखिर दर्शन करने की सलाह देता है, जिन्होंने उस भवन के निर्माण में पुरोचन की मदद की थी. वो भी एक औरत और उसके पांच पुत्र हैं, जो मदिरा के नशे में हैं. उधर कर्ण बार-बार दुर्योधन को लाक्षागृह में होने वाली दुर्घटना को रोकने के लिए कहता है, लेकिन दुर्योधन नहीं समझता.

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इधर पुरोचन भी उन वन वासियों को लाक्षागृह बुलाकर मदिरा में मिलावट कर उन्हें पिलाता है, क्योंकि वो ये चाहता है कि लाक्षागृह में पांचों पांडव और कुंती के साथ वो भी जलकर भस्म हो जाएं, ताकि कोई सुराग ना रहे. उधर समय को नष्ट किए बिना भीम, पुरोचन के आग लगाने से पहले ही मां कुंती, सहदेव, नकुल, अर्जुन और युधिष्ठिर को सुरंग में भेजकर अपने हाथों से लाक्षागृह में आग लगा देता है और खुद भी उस सुरंग से बाहर निकल जाता है. इस आग में पुरोचन भी जलकर मार जाता है.

लाक्षागृह को आग की लपटों में देखकर वारणावत के सभी लोग वहां आ जाते हैं और लाक्षागृह के जलने का समाचार शकुनि को मिलता है. वो बहुत खुश होता है लेकिन वो इस बात से अनजान है कि पांचों पांडव और कुंती उस सुरंग से बाहर वन की ओर निकल गए हैं.

पांडवों और कुंती की मृत्यु का समाचार

शकुनि पांडवों और कुंती की मृत्यु का समाचार दुर्योधन को देता है. साथ ही दुर्योधन को हस्तिनापुर के सिंघासन पर बैठाकर खुश होता. फिर शकुनि यही समाचार लेकर धृतराष्ट्र के पास जाता है, जिसे सुनकर धृतराष्ट्र और गांधारी, दोनों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है. धृतराष्ट्र को यही लगता है पांचों पांडवों को मारने का षडयंत्र शकुनि ने रचा है और क्रोधित होकर वो शकुनि को वहां से जाने का आदेश देते हैं. धृतराष्ट्र और गांधारी दोनों, पांचों पांडव और कुंती की मृत्यु पर शोक जताते हैं और यह समाचार तातश्री भीष्म को देते हैं. जिसे सुनकर वो शोक में डूब जाते हैं.

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इनपुट- साधना

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