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Kamal Amrohi Death Anniversary: 17 साल इंतजार के बाद कमाल ने बनाई वो फिल्म, जिसने रचा इतिहास

महान फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही की पुण्यतिथि पर बता रहे हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें और पाकीजा मूवी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से.

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कमाल अमरोही (तस्वीर यूट्यूब स्क्रीनशॉट)
कमाल अमरोही (तस्वीर यूट्यूब स्क्रीनशॉट)

बॉलीवुड में जिस तरह के सेट्स आपको संजय लीला भंसाली की फिल्मों में नजर आते हैं वैसे ही सेट्स एक जमाने में कमाल अमरोही की फिल्मों में नजर आते थे. कमाल अमरोही ने महल से लेकर पाकीजा जैसी फिल्में बनाईं. जिन्हें आज भी उतना ही पसंद किया जाता है जितना उस दौर में किया जाता था. इस महान फिल्म निर्देशक की पुण्यतिथि पर बता रहे हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें और पाकीजा मूवी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें.

हिन्दी सिनेमा के इस शानदार फिल्ममेकर का जन्म 17 जनवरी 1918 में यूपी के अमरोहा में हुआ था. फिल्म इंडस्ट्री को कमाल ने महल (1949), पाकीजा (1972), रजिया सुल्तान (1983) जैसी बेहतरीन फिल्में दी. कमाल अमरोही को फिल्मों को उनके परफेक्शन के लिए जाना जाता था. वे छोटे-छोटे सीन्स पर ध्यान देते थे और उसे अपने विजन से बेहद खूबसूरत बना देते थे.

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कमाल अमरोही के जीवन की सबसे सफल और लोकप्रिय फिल्म रही पाकीजा. फिल्म के सीन्स, कास्ट, संगीत, स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स सब कुछ शानदार थे. फिल्म का प्रभाव इतना असरदार था कि आज भी लोग इस फिल्म को अपने जहन से नहीं हटा पाए हैं. जिस फिल्म को पूरा बनकर तैयार होने में ही 16-17 साल लग गए हों उस मूवी से परफेक्ट भला और क्या हो सकता है. साल 1953 में दायरा फिल्म के फ्लॉप हो जाने के बाद कमाल अमरोही के मन में ये फिल्म बनाने का ख्याल आया था.

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साल 1956 में उन्होंने मीना कुमारी के साथ मिल कर इस फिल्म को बनाने का फैसला लिया. पहले इस फिल्म को ब्लैक एंड व्हाइट में बनाने की योजना थी मगर बाद में इसे कलर प्रिंट में बनाने का फैसला लिया गया. कमाल अमरोही फिल्म को हाई क्वॉलिटी के लेंसेस से शूट करना चाहते थे. मगर टेक्निकल फॉल्ट की वजह से ऐसा हो नहीं सका. फिल्म तब तक धीरे-धीरे अपने पूर्ण स्वरूप में आने से अभी काफी दूर थी.

यहां तक कि साल 1964 में जब आपसी मनमुटाव के कारण मीना कुमारी और कमाल अमरोही अलग हो गए उस समय भी फिल्म का बनना रुका नहीं. इस समय तक फिल्म आधी से ज्यादा बन चुकी थी मगर दोनों के रिश्ते में आई खटास की वजह से फिल्म की शूटिंग को थोड़े समय के लिए रोक देना पड़ा था. फिर दोनों की आपसी सहमती के बाद फिल्म बनी और क्या शानदार बनी. इस दौरान लगभग डेढ़ दशक बीते और इसी के साथ कई सारे बदलाव भी आए.

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मगर जब फिल्म बनकर तैयार हुई तो लाजवाब बनीं. फिल्म 4 फरवरी, 1972 को बनी. फिल्म की कास्ट की बात करें तो इसमें मीना कुमारी, राज कुमार के अलावा आशोक कुमार और नादिरा भी अहम रोल में थे. फिल्म के निर्माता और निर्देशक तो कमाल अमरोही थे ही इसके अलावा उन्होंने फिल्म लिखी भी थी. फिल्म में मजरूह सुल्तानपुरी और कैफी आजमी के लिरिक्स थे. फिल्म का म्यूजिक गुलाम मोहम्मद और नौशाद ने दिया था.

फिल्म की रिलीज के एक महीने में ही गुजर गईं थीं मीना कुमारी

फिल्म को लेकर अफसोस ये रहा कि इतनी डेडिकेशन के साथ फिल्म बनाने के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर ये मूवी बहुत ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाई हालांकि हिट जरूर रही. इसी वजह से आज तक की सबसे बड़ी कल्ट फिल्मों में गिना जाता है. इस फिल्म के साथ ये अफसोस और रहा कि इसकी रिलीज के एक महीने के अंदर ही मीना कुमारी का निधन हो गया. कमाल अमरोही की बात करें तो 11 फरवरी, 1993 को कमाल अमरोही ने दुनिया को अलविदा कहा.

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