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मुझे गोरा दिखने का कोई शौक नहीं हैः टीना सिंह

ए.आर. मुरुगदॉस की 'अकीरा' के साथ बॉलीवुड में कदम रखने वाली टीना सिंह हुई खास बातचीत के पेश हैं कुछ मुख्य अंश:

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टीना सिंह
टीना सिंह

वह पंजाब के लुधियाना से निकलकर दिल्ली जैसे किसी महानगर में कदम रखने वाली अपने परिवार की पहली सदस्य थीं. उन्हें बंधी-बंधाई परिपाटी पर चलना पसंद नहीं और वह बिना किसी रूलबुक वाले जीवन में यकीन करती हैं. अपने शॉर्ट हेयर और डार्क कॉम्प्लेक्शन को वह अपनी यूएसपी मानती हैं.

ए.आर. मुरुगदॉस की 'अकीरा' के साथ बॉलीवुड में कदम रख रही हैं और फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा को तंग करती नजर आ रही हैं. 70 से ज्यादा विज्ञापनों में नजर आ चुकी मॉडल-एक्टर टीना सिंह से हुई खास बातचीत के पेश हैं मुख्य अंशः

'अकीरा' में आप सोनाक्षी को तंग कर रही हैं, क्या स्कूल में भी आप इसी तरह की थीं?
नहीं, स्कूल लाइफ में सब लोग मुझे ही Bully करते थे. स्कूल में मैं काफी इंट्रोवर्ट थी . ज्यादा बोलती नहीं थी. ज्यादा दोस्त भी नहीं थे. इसलिए सभी लोग मुझे ही तंग करते थे.

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तो आपने कभी किसी को तंग नहीं किया?
एक बार बारहवीं में किसी की रैगिंग की थी बस.

सुना है आप अपने परिवार की मर्जी के बिना घर से निकली थीं?
मैं पंजाब के एक ऐसे परिवार से हूं जहां लड़कियों की 18 साल की होने तक शादी कर दी जाती है. ऐसा ही मेरे साथ भी होना था. हमारे परिवार का कोई सदस्य कभी किसी बड़े शहर में नहीं गया था. जब मैंने अपने पापा को यह बात बताई तो वे हैरत में आ गए. लेकिन अपनी बात पर डटी रही और अपना सफर शुरू किया.

इस सफर के बारे में बताएं?
मैं घर से निकलकर दिल्ली आई और यहां दिल्ली यूनिवर्सिटी में इंग्लिश ऑनर्स में दाखिला ले लिया. मैं पढ़ाई के साथ दिल्ली में इवेंट्स का काम कर रही थी. फिर मैं योग सीखने की खातिर एक साल के लिए गोवा आ गई. मैंने बार टेंडिंग काम भी किया और मैं बहुत अच्छी कॉकटेल बनाती हूं. मैं मुंबई आई तो यहां भी इवेंट्स कर रही थी. फिर कुछ कास्टिंग डायरेक्टर्स ने फेसबुक पर मेरे फ्रेंड सर्कल में मेरी तस्वीर देखी तो ऑफर आए और मैंने विज्ञापन करने शुरू कर दिए. पैसा अच्छा था तो काम करने लगी लेकिन मैंने इवेंट्स को नहीं छोड़ा. फिर मॉडलिंग के साथ ही मुझे एक्टिंग के कीड़े ने भी काट लिया.

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कुछ खास तैयारी की?
हां, मैंने डिक्शन पर मेहनत की. कुछ एक्टिंग क्लासेज भी ली. थोड़ा वजन भी घटाया. फिर एक दिन मुझे 'अकीरा' के ऑडिशन के लिए बुलावा आया. मैं ऑडिशन दे आई लेकिन तीन महीने तक कोई जवाब नहीं आया. फिर एक दिन अचानक मुझे लुक टेस्ट के लिए फोन आया और मैं सिलेक्ट हो गई.

फिल्म इंडस्ट्री में आउटसाइडर के लिए खुद को स्थापित करना कितना मुश्किल होता है?
काफी मुश्किल है. आप देखिए हर साल 5-6 नए चेहरे लॉन्च होते हैं, उनमें से ज्यादातर फिल्मी बैकग्राउंड के ही होते हैं. अगर मेरे डैड प्रोड्यूसर होते तो मुझे लॉन्च करते. इस तरह एंट्री आसान हो जाती है. लेकिन एक बार मौका मिलने के बाद तो आपका काम ही है जो आपको आगे लेकर जाता है.

अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बताएं?
'अकीरा' के अलावा नेटफ्लिक्स की सीरीज 'सेंस-8' कर रही हूं. 24 के सीजन-2 में भी हूं. इसके अलावा धोनी पर बनी फिल्म का एक प्रोमो भी शूट किया है. कोई फिल्म साइन नहीं की है.

लीड रोल करना चाहेंगी?
बिल्कुल करना चाहूंगी लेकिन कुछ हटकर होना चाहिए. मैंने हमेशा हटकर किया है. मेरे छोटे बाल हैं. लोगों ने कहा मुझे काम नहीं मिलेगा. मुझे कोई कहता कि विग लगाकर आओ लेकिन मैंने कभी किसी की नहीं सुनी. कई लोग तो मेरे स्किन कलर को लेकर कहते कि थोड़ा गोरा बनकर आया करो. मेरा मानना है कि अगर आपके फीचर अच्छे हैं तो कलर कोई मायने नहीं रखता है.

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स्किन कलर को लेकर क्या कहना है?
भारत कलर को लेकर काफी स्टीरियोटाइप है. जब मैं छोटी थी तो अपने डार्क स्किन कलर को लेकर हमेशा परेशान रहती. लेकिन समझ आने के बाद यह सब बातें पीछे छूट गईं. मैंने अपनी यूएसपी को पहचाना और मुझे गोरा दिखने का कोई शौक नहीं है. मैं शूटिंग के दौरान फाउंडेशन नहीं लगाती. अगर कोई डायरेक्टर मुझे गोरा करने के लिए कहता है तो मैं मना कर देती हूं. मैं इस बात को बदल देना चाहती हूं कि लड़की गोरी नहीं है तो अच्छी नहीं है. हर किसी को अपने ढंग से जीने की फ्रीडम होना चाहिए.

​​आप विदेश में भी काम कर रही हैं, वहां स्किन कलर को लेकर क्या व्यूज हैं?
आप यकीन नहीं करेंगे कि 'सेंस-8' की शूटिंग के दौरान उन लोगों ने मेरे ब्राउन कलर को लेकर मुझे कितने कॉम्प्लिमेंट दिए. वो लोग तो इस कलर के दीवाने हैं, मुझे अपनी हर बात पर गर्व है.

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