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नौशाद की धुनों में बसती थी भारतीय संस्कृति

नौशाद साहब, ये नाम सुनते ही जेहन में गूंजने लगत हैं सैकड़ों तराने, जिन्हें अपनी धुनों से तराशा था नौशाद ने. मुहम्मद रफी, सुरैया और लता मंगेशकर की आवाज को उन्होंने नई बुलंदी दी. उनकी धुनों में बसती थी भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय संगीत की आत्मा.

नौशाद नौशाद

नौशाद साहब, ये नाम सुनते ही जेहन में गूंजने लगत हैं सैकड़ों तराने, जिन्हें अपनी धुनों से तराशा था नौशाद ने. मुहम्मद रफी, सुरैया और लता मंगेशकर की आवाज को उन्होंने नई बुलंदी दी. उनकी धुनों में बसती थी भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय संगीत की आत्मा.

नौशाद साहब शास्त्रीय संगीत के उस्ताद थे. संगीत का मोह उन्हें मुंबई खींच लाया था. जब उन्हें कामयाबी की राह मिली तो उन्होंने अपनी शर्तों पर कामयाबी की मंजिलें तय कीं. शास्त्रीय और लोक संगीत से जिंदगी भर बना रहा नौशाद साहब का नाता.

नौशाद साहब लखनऊ के थे. मामा की म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स की दुकान थी, यहीं उनका नाता संगीत से जुड़ गया. म्यूजिक जुनून बनने लगा तो पिता ने कहा, या घर चुन लो या फिर म्यूजिक. नौशाद साहब ने म्यूजिक चुना और 17 साल की उम्र में लखनऊ से कूच कर गए मुंबई के लिए.

नौशाद साहब ने अपनी जिंदगी में कई गायकों को मौका दिया, कई गायकों की आवाज तराशी. सुरों की मलिका लता मंगेशकर को भी नौशाद ने बहुत कुछ सिखाया. आज भी नौशाद की उस सीख को जब लता दीदी याद करती हैं तो भीग जाती है उनकी आवाज.

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