त्योहारों का मौसम है और इस बीच साउथ की जनता पोंगल का इंतजार कर रही है. ये त्योहार नजदीक आते ही तमिल सिनेमा भी बॉक्स ऑफिस पर एक जबरदस्त टक्कर की ओर बढ़ रहा है. इस हफ्ते दो बड़ी फिल्में, विजय थलापति की 'जन नायगन' और शिवकार्तिकेयन की 'पराशक्ति' रिलीज होने जा रही है. एक दिन के गैप में दोनों फिल्में पर्दे पर आएंगी.
रिलीज हो रही विजय की आखिरी फिल्म
फिल्म 'जन नायगन', 9 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में आएगी. वहीं 'पराशक्ति', 10 जनवरी को रिलीज होगी. इन दोनों ही फिल्मों की क्लोज टाइमिंग ने इंडस्ट्री और फैंस के बीच उत्साह, बहस और तनाव पैदा कर दिया है. ऊपर से ये एक सामान्य पोंगल बॉक्स ऑफिस मुकाबला लगता है. लेकिन असल में यह राजनीति की एक रिहर्सल जैसी महसूस होती है. विजय की फिल्म पहले आ रही है, जबकि 'पराशक्ति', जो डीएमके के पहले परिवार के एक सदस्य द्वारा निर्मित है, अपनी रिलीज डेट 14 जनवरी से आगे बढ़ाकर एक दिन बाद लाई जा रही है. इस छोटे से गैप में सिनेमा और राजनीति एक-दूसरे में घुलमिल जाते हैं.
'जन नायगन' को विजय की आखिरी फिल्म के रूप में प्रमोट किया जा रहा है. वे जल्द अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के साथ राजनीति में एंट्री करने वाले हैं. पोंगल रिलीज की घोषणा की गई थी, जिसका तुरंत फैंस ने 'बॉक्स ऑफिस पर उनकी आखिरी रेड' कहकर जवाब दिया.
3 जनवरी को रिलीज हुआ पिक्चर का ट्रेलर संदेह के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ता. विजय का किरदार एक नेता और रक्षक के रूप में दिखाया गया है. जब एक बच्चा पूछता है कि क्या वे सुपरहीरो हैं, तो वे जवाब देते हैं कि वे एक साधारण इंसान हैं जिनके कामों को विशेष माना जाता है. ट्रेलर एक साफ वादे के साथ खत्म होता है: 'मैं आ रहा हूं.'
पिक्चर ही नहीं, राजनीतिक टकराव भी...
'पराशक्ति', सुधा कोंगारा के निर्देशन में बनी शिवकार्तिकेयन स्टारर पिक्चर है. इसे आकाश बास्करन ने प्रोड्यूस किया है, जो डीएमके के पहले परिवार से अपनी शादी के चलते जुड़े हुए हैं. आईएमडीबी के अनुसार, फिल्म 1965 के हिंदी थोपने विरोधी आंदोलनों पर बेस्ड सच्ची घटनाओं पर आधारित है. ट्रेलर में दिखाया गया है कि कानून हिंदी को एकमात्र राष्ट्रीय भाषा के रूप में लागू करता है, जिससे विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं. यह साफ रूप से कहता है कि विरोध भाषा के खिलाफ नहीं, बल्कि उसे थोपने के खिलाफ है, न कि भाषा बोलने वालों के खिलाफ. अन्नादुराई की छोटी झलक इस फिल्म को राजनीतिक इतिहास से जोड़ती है.
'पराशक्ति' की रिलीज दीवाली 2025 के लिए निर्धारित की गई थी. 'जन नायगन' को भी उसी समय के आसपास रिलीज होना था. हालांकि बाद में मेकर्स ने इसे पोंगल पर शिफ्ट कर दिया. बाद में विजय की फिल्म ने भी पोंगल स्लॉट लॉक किया, जिससे 'पराशक्ति' ने अपनी रिलीज को और आगे बढ़ाया. 'जन नायगन' की रिलीज को कुछ ही दिन बचे हैं. सोशल मीडिया पर दोनों पिक्चरों की तुलनाएं भरी पड़ी हैं, खासकर रिलीज डेट बदलने के बाद. बहस तब और तेज हो गई जब 'पराशक्ति' को स्टालिन के रिश्तेदार द्वारा प्रोड्यूस किया गया. इसे उदयनिधि स्टालिन के बेटे इनबन उदय डिस्ट्रीब्यूट किया जा रहा है.
यह कॉम्पिटिशन सिनेमाघरों से बाहर भी फैल गया है. मदुरै में 'जन नायगन' ट्रेलर स्क्रीनिंग के दौरान 'पराशक्ति' के पोस्टर फाड़ दिए गए, जिसका विजय के फैंस पर आरोप लगा. चेन्नई में, विजय की पार्टी से जुड़े नारे 'पराशक्ति' के ऑडियो लॉन्च के आड़े आ रहे थे. तनाव के बावजूद, थिएटर मालिकों ने संतुलन बनाने की कोशिश की है. 'जन नायगन' के तमिलनाडु में कुल 1,200 स्क्रीनों में से 500 से 600 स्क्रीनों पर रिलीज होने की उम्मीद है, जबकि 'पराशक्ति' 400 से 450 स्क्रीनों पर.
जैसे-जैसे पोंगल नजदीक आ रहा है, तमिलनाडु एक ऐसे टकराव की तैयारी कर रहा है जहां सिनेमा, फैनडम और राजनीति एक साथ आ जाते हैं. इससे यह त्योहारों का सीजन कई साओं में सबसे ज्यादा नजर रखा जाने वाला बन गया है. देखना दिलचस्प होगा कि बॉक्स ऑफिस पर किसकी जीत होती है.