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इंजीनियर, IAS बनने के सपने होते हैं जहां पूरे, उन मोहल्लों की कहानी इन सीरीज में दिखी

किसी सरकारी एग्जाम से होकर गुजरने वाले हर शख्स ने यूपीएससी के बारे में जरूर सोचा होगा. दिया होगा या फिर देने की तैयारी की होगी. सभी जानते हैं कि इसकी कोचिंग के लिए सबसे ज्यादा फेमस है दिल्ली का वो इलाका जहां तैयारी करने वाले छात्रों का कुंभ लगता है. यानी राजेंद्र नगर, मुखर्जी नगर जैसे मोहल्ले.

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aspirants स्टारकास्ट
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फिल्मों और वेब सीरीज की कहानियां अब बड़े-बड़े शहरों, बिल्डिंगों से निकल कर छोटे शहरों-कस्बों की ओर आ गई हैं. अगर कहानी में जिक्र किसी बड़े शहर का है भी तो उससे ज्यादा उस शहर के इलाके का जिक्र है जहां नई डिजिटल कहानियों का प्लॉट लिखा जा रहा है. ये इलाके, मोहल्ले हमेशा से रहे हैं, कभी कभी इसका जिक्र भी हुआ है लेकिन कभी ये सेंटर रोल में नहीं रहे. फोकस इन पर नहीं रहा. पर डिजिटल में कहानियों को नए तरीके से पेश करने की आजादी ने इन्हें इन इलाकों-मोहल्लों की घरेलू चमक-धमक, अहमियत को इंटरनेशनल बना दिया है.

अब कुछ दिन पहले टीवीएफ की Aspirants को ही ले लीजिए या दो साल पहले आई कोटा फैक्ट्री. इन दोनों की कहानी भले ही शहर में है पर आत्मा राजेंद्र नगर और तलवंडी जैसे इलाकों में बसी है. और यहीं क्रिएटर की ये कोशिश कि ये दिखाया जाए जहां रियल में बच्चे रहकर तैयारी करते हैं.

किसी सरकारी एग्जाम से होकर गुजरने वाले हर शख्स ने यूपीएससी के बारे में जरूर सोचा होगा. दिया होगा या फिर देने की तैयारी की होगी. सभी जानते हैं कि इसकी कोचिंग के लिए सबसे ज्यादा फेमस है दिल्ली, बल्कि दिल्ली का वो इलाका जहां तैयारी करने वाले छात्रों का कुंभ लगता है. यानी राजेंद्र नगर, मुखर्जी नगर जैसे मोहल्ले. यहां देश के दूर दराज से आंखों में सपने लिए हजारों बच्चे आते हैं, कुछ बड़े अफसर बनते हैं तो कुछ प्लान बी के साथ जिंदगी के साथ सेटल होते हैं, पर उनके जीवन से ये मोहल्ले कभी नहीं निकलते.

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Aspiratns में राजेंद्र नगर का आइना 
अगर Aspiratns की बात करें तो यहां भी बचपन के दोस्त तैयारी के लिहाज से राजेंद्र नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर में मिलते हैं. यहां आगे बढ़ने, कुछ कर दिखाने की उनकी जर्नी शुरू होती है जो कि आपसी खींचतान, प्यार, झगड़े से होते हुए निकलती है. वेब सीरीज में जिस इलाके की तस्वीर दिखाई गई है वो सिर्फ एक मोहल्ला भर नहीं है बल्कि हजारों तैयारी करने वाले छात्रों के सपने की बुनियाद है. 

मकान मालिक से लेकर रिक्शा वाला, चाय की टपरी से लेकर कोचिंग के टीचर यहां सबका मिजाज अफसरों वाला मिलता है. यहां कई छोटी- छोटी कहानियां निकलती हैं, वो ना सिर्फ किरदारों का आगे बढ़ाती हैं बल्कि असल जिंदगी में तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी ये मोहल्ले मुश्किलों से उबरना सिखाते हैं. राजेंद्र नगर जैसे और कई इलाके हैं दिल्ली में जहां दिन रात मेहनत की कहानियां लिखी जाती हैं. इसमें करोलबाग, लक्ष्मीनगर भी ऐसे इलाके हैं जहां देश के हजारों बच्चे कोचिंग-तैयारियों की लिए आते रहे हैं. 


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कोटा फैक्ट्री का तलवंडी
इंजीनियरिंग या मेडिकल के क्षेत्र में कभी आगे बढ़ने की चाह रखने वाले 10वीं 12वीं के बच्चों के लिए कोटा कहीं से भी कम नहीं है. टीवीएफ ने कोटा फैक्ट्री जैसी बड़ी वेब सीरीज ऐसे ही बच्चों और उनके अरमानों को ध्यान में रखकर बनाई. इसके लिए फिर लोकेशन और प्लाट का जरिया बना शहर का विज्ञान नगर और तलवंडी. साइंस की ग्रेड, क्वालिफिकेशन में रैंकिंग की तरह इन दो मोहल्लों के बीच भी बड़ा अंतर है. रियल लाइफ में भी देखें तो कोटा फैक्ट्री की तरह ही तलवंडी भी आज इंजीनियरिंग और मेडिकल के हजारों बच्चों के लिए लाइफ बदलने का एक सेंटर है. 

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ऐसे इलाकों की रियल लोकेशन ही नहीं बल्कि उनकी टोन, इमेज, प्रतीक को पकड़कर डिजिटल की दुनिया के नए क्रिएटर ना सिर्फ नए प्लाट लिख रहे हैं बल्कि नई कहानियां-किस्से ला रहे हैं जो आज की यंग जेनरेशन को अपने दिल, अपनी मुश्किलों के काफी करीब और रियल लग रही है. यही कारण है कि ये वेब सीरीज इतनी कामयाब भी हो रही हैं. 
 

 

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